जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बताया विकास की अगली सीमा

Wed 24-Jun-2026,11:15 PM IST +05:30

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जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बताया विकास की अगली सीमा BRICS Space Meeting
  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी को विकास की नई सीमा बताया।

  • अंतरिक्ष नवाचार, निवेश और सहयोग बढ़ाने पर जोर।

  • स्पेस सस्टेनेबिलिटी, सैटेलाइट सहयोग और ब्रिक्स स्पेस काउंसिल पर चर्चा।

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिक्स देशों से अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया है। बेंगलुरु में आयोजित ब्रिक्स अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी” वैश्विक विकास की अगली बड़ी सीमा बनने जा रही है और सदस्य देशों को मिलकर नवाचार, निवेश, उद्यमिता तथा सतत विकास के नए अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विशाल वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता, औद्योगिक ताकत और मानव संसाधन मौजूद हैं, जो उन्हें तेजी से विकसित हो रही वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का भविष्य किसी एक देश के अकेले प्रयासों से नहीं, बल्कि साझेदारी, साझा नवाचार और सामूहिक महत्वाकांक्षा से तय होगा।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में अंतरिक्ष सहयोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष उद्योग पुस्तिका का विमोचन किया और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ स्मृति चिह्नों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते न्यू स्पेस सेक्टर, स्टार्टअप्स और निजी अंतरिक्ष कंपनियों की उपलब्धियों को भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका और अंतरिक्ष उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

बैठक में अंतरिक्ष की स्थिरता, अंतरिक्ष मलबा-मुक्त मिशन, ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन को मजबूत करने, नए सदस्य देशों की भागीदारी बढ़ाने और प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही आपदा प्रबंधन, पृथ्वी अवलोकन, क्षमता निर्माण और डेटा साझा करने के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अब केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि संचार, नेविगेशन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य और जल सुरक्षा तथा पर्यावरणीय चुनौतियों जैसी वैश्विक समस्याओं का समाधान अंतरिक्ष तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और वैश्विक साझेदारियों के लिए खोले गए नए अवसरों ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष इकोसिस्टम में शामिल कर दिया है। चंद्रयान-3, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे मिशनों ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई पहचान दी है।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स देशों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सह-विकास, सह-नवाचार और सह-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि साझा प्रयासों के जरिए ब्रिक्स देश न केवल वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोज सकते हैं, बल्कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई संभावनाओं और आर्थिक अवसरों का भी सृजन कर सकते हैं।