AMU में बोले राज्यसभा उपसभापति हरिवंश: सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम है प्रौद्योगिकी
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AMU Lecture
एएमयू में हरिवंश ने दिया सर सैयद अहमद स्मृति व्याख्यान।
सामाजिक परिवर्तन और समावेशन में तकनीक की भूमिका पर जोर।
डिजिटल डिवाइड खत्म कर तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने की अपील।
Aligarh / राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आयोजित प्रतिष्ठित सर सैयद अहमद स्मृति व्याख्यान में कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने "सामाजिक परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका : भारतीय परिप्रेक्ष्य" विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि तकनीक केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का एक शक्तिशाली उपकरण भी है।
यह व्याख्यान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की सर सैयद अकादमी द्वारा आयोजित वार्षिक स्मृति व्याख्यानमाला के तहत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में हरिवंश ने सर सैयद अहमद खान की दूरदर्शी सोच को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक ज्ञान को समाज सुधार का आधार बनाया था। आज भी उनकी यह सोच उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए वैज्ञानिक सोच और नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने दुनिया के कई देशों और ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए बताया कि तकनीक ने समय-समय पर समाजों को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। यदि तकनीक केवल कुछ लोगों तक सीमित रह जाए तो सामाजिक असमानता और बढ़ सकती है।
हरिवंश ने डिजिटल डिवाइड यानी डिजिटल असमानता को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में तकनीकी नवाचारों को सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग समान रूप से लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत में नई तकनीकों के व्यापक उपयोग से सामाजिक समावेशन को मजबूती मिली है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ी है। इसके साथ ही लोकतांत्रिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
उपसभापति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य उभरती तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इनके प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन पहलों से पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव कल्याण को बढ़ावा मिला है। उन्होंने इसे "प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण" बताया, जहां तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान एएमयू प्रशासन और सर सैयद अकादमी ने हरिवंश का स्वागत किया और सर सैयद अहमद खान की शिक्षा एवं सामाजिक सुधार संबंधी विरासत पर प्रकाश डाला। यह व्याख्यान एक बार फिर इस बात का उदाहरण बना कि शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।