Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: हाई कोर्ट ने सजा बरकरार रखी, जेल भेजने का आदेश
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि और जेल की सजा बरकरार रखी।
मामला फिल्म अता पता लापता के लिए लिए गए 5 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़ा है।
कोर्ट ने अभिनेता के व्यवहार को संदिग्ध बताते हुए दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया।
Mumbai / बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है। हालांकि अदालत ने उनकी छह महीने की सजा को घटाकर तीन महीने कर दिया है, लेकिन कोर्ट ने उनके व्यवहार को "संदिग्ध" बताते हुए कड़ी टिप्पणी भी की है। यह मामला करीब 16 साल पुराना है और एक फिल्म के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि फिल्म की कमाई से यह राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।
फिल्म के फ्लॉप होने के बाद आर्थिक संकट गहराता गया और कर्ज चुकाने में परेशानी आने लगी। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि मूल राशि के अलावा समझौते के तहत अतिरिक्त भुगतान का वादा भी किया गया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हुआ।
कैसे पहुंचा मामला कोर्ट तक?
साल 2018 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसी दौरान राजपाल यादव द्वारा जारी किए गए कई चेक बैंक में फंड की कमी के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें चेक बाउंस के कई मामलों में दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि राजपाल यादव ने इस फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी, जिसके कारण मामले की सुनवाई लंबी चलती रही।
भुगतान के कई मौके, लेकिन नहीं हुआ समझौता
दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 और 2025 के दौरान राजपाल यादव को कई अवसर दिए ताकि वह बकाया राशि का भुगतान कर सकें। लेकिन ब्याज और अन्य देनदारियों को जोड़ने के बाद कुल बकाया रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कोर्ट ने कई बार भुगतान की समय-सीमा तय की, लेकिन अभिनेता निर्धारित समय पर भुगतान नहीं कर सके। अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की सलाह भी दी थी। शिकायतकर्ता पक्ष 6 करोड़ रुपये लेकर अंतिम समझौते के लिए तैयार था, लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
तिहाड़ जेल में करना पड़ा था सरेंडर
भुगतान संबंधी वादों को पूरा नहीं करने पर अदालत ने 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था। उन्होंने जेल में लगभग 12 दिन बिताए और बाद में 16 फरवरी को अंतरिम जमानत पर रिहा हुए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके बयानों में विरोधाभास पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने टिप्पणी की थी कि दिए गए आश्वासनों और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दे रहा है।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन जेल की अवधि छह महीने से घटाकर तीन महीने कर दी।
इसके साथ ही कोर्ट ने प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया। अदालत ने फैसले के खिलाफ अपील के लिए उन्हें दो महीने का समय भी दिया है।
हालांकि, कोर्ट ने उनके व्यवहार को "संदिग्ध" बताते हुए अधिकारियों को उन्हें दोबारा जेल भेजने का निर्देश दिया।
निष्कर्ष
करीब डेढ़ दशक से चल रहे इस कानूनी विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने राजपाल यादव को बड़ा झटका दिया है। फिल्म निर्माण के लिए लिया गया कर्ज, चेक बाउंस मामले और लंबे समय तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अब अभिनेता को फिर से जेल जाना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या राजपाल यादव इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे या फिर अदालत के आदेश का पालन करेंगे।