Kempegowda Jayanti 2026: उपराष्ट्रपति ने केम्पेगौड़ा के योगदान को किया याद
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Kempegowda Jayanti 2026
उपराष्ट्रपति ने केम्पेगौड़ा को दूरदर्शी प्रशासक और समाज सुधारक बताया।
बेंगलुरु को केम्पेगौड़ा की समावेशी सोच का जीवंत उदाहरण कहा।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण और जल संरक्षण के लिए आगे आने की अपील।
Bengaluru / भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु में आयोजित नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती समारोह में भाग लेते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि केम्पेगौड़ा केवल बेंगलुरु के संस्थापक ही नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी प्रशासक, पर्यावरण प्रेमी, समाज सुधारक और ऐसे नेता थे जिनकी सोच आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि केम्पेगौड़ा को केवल एक शासक के रूप में याद करना उनके व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। वे ऐसे दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने लोगों के कल्याण और भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई थीं। उन्होंने एक ऐसे शहर की कल्पना की थी जहां किसान, व्यापारी, कारीगर, विद्वान और विभिन्न धर्मों एवं संस्कृतियों के लोग एक साथ रहकर विकास कर सकें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज का बेंगलुरु वास्तव में उसी सोच का जीवंत उदाहरण है और “मिनी भारत” के रूप में देश की विविधता और एकता को दर्शाता है।
सी. पी. राधाकृष्णन ने केम्पेगौड़ा की शहरी विकास संबंधी दूरदृष्टि की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि लगभग पांच सौ वर्ष पहले केम्पेगौड़ा ने जिस तरह से शहर के विकास की योजना बनाई थी, वह आज भी आधुनिक नगर नियोजन के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने व्यवस्थित बाजार, आवासीय क्षेत्र, जल संरक्षण प्रणाली और सार्वजनिक स्थलों का निर्माण कर एक संतुलित और टिकाऊ शहर की नींव रखी थी।
उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से केम्पेगौड़ा द्वारा विकसित झीलों और जलमार्गों के नेटवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर उनकी सोच समय से काफी आगे थी। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और जल संसाधनों के संरक्षण की उनकी नीति आज जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में भी मार्गदर्शन देती है।
उन्होंने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता के प्रति केम्पेगौड़ा की प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कन्नड़ संस्कृति से गहराई से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान किया। उनका मानना था कि किसी भी महान शहर की पहचान केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण से होती है।
बेंगलुरु की वर्तमान पहचान पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज यह शहर भारत की तकनीकी और नवाचार राजधानी के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है। लेकिन इसकी सफलता की जड़ें केम्पेगौड़ा द्वारा रखी गई मजबूत नींव में हैं। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक सोच, टिकाऊ विकास और संस्थान निर्माण की उनकी नीतियां विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केम्पेगौड़ा के जीवन और कार्यों से प्रेरणा लें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए नदियों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता भी बताई, ताकि देश के किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिल सके।
इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, विपक्ष के नेता आर. अशोक, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. सी. एन. अश्वथ नारायण सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह में केम्पेगौड़ा के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया।