12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती : युवाओं के महानायक को नमन
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12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती पर देशभर में कार्यक्रम, युवाओं को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा का संदेश।
विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, शिक्षा और चरित्र निर्माण पर विशेष जोर।
स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों में विचार गोष्ठी, योग सत्र और प्रेरणादायक आयोजन होंगे।
Delhi / सदी के महानायक और भारत के अमर विचारक स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर उनकी शिक्षाओं, विचारों और राष्ट्र के प्रति योगदान को याद किया जाएगा। स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो युवाओं को प्रेरणा देने का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, वेदांत और मानवता के मूल्यों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। उनके विचार आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सेवा भाव का मार्ग दिखाते हैं। उनका प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
12 जनवरी के अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाषण प्रतियोगिता, विचार गोष्ठी, योग एवं ध्यान सत्र, और स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित चर्चाएं शामिल होंगी। कई स्थानों पर युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि विवेकानंद के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गए हैं, जब युवा वर्ग को सही दिशा और सकारात्मक सोच की जरूरत है।
स्वामी विवेकानंद ने हमेशा शिक्षा को चरित्र निर्माण का माध्यम बताया। उनका मानना था कि केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिकता और आत्मबल से ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है। यही कारण है कि उनकी जयंती पर शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस किया जाता है।
कुल मिलाकर, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि युवाओं को जागरूक, सशक्त और राष्ट्रभक्त बनाने का संदेश है। यह दिन देश के भविष्य को दिशा देने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का पर्व बनकर उभरता है।