भूपेंद्र यादव का वन अधिकारियों को संदेश: वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक पर जोर
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IFS Officers Training
भूपेंद्र यादव ने वन अधिकारियों से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण मजबूत करने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण में 18 कैडरों के 68 आईएफएस अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और एआई जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया।
New Delhi / क्या भारत के जंगलों और वन्यजीवों को बचाने के लिए अब आधुनिक तकनीक और नई रणनीतियों की जरूरत है? नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
देश के पर्यावरण, वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस के मध्य-करियर प्रशिक्षण चरण-III के अधिकारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत की पारिस्थितिक विरासत की रक्षा, वन क्षेत्र बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया।
मंत्री भूपेंद्र यादव ने विभिन्न राज्य कैडरों से आए अधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत के वनों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने वन और वृक्ष आवरण बढ़ाने, कार्बन पृथक्करण, आर्द्रभूमि संरक्षण और क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
इस दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’, मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल और नगर वन योजना जैसी पहलों का भी जिक्र किया गया। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगलों में आग, जलवायु परिवर्तन और विकास परियोजनाओं के साथ संरक्षण संबंधी जरूरतों के संतुलन को प्रमुख चुनौतियां बताया। इन समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को जरूरी बताया गया।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत में जलवायु, पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता की व्यापक विविधता मौजूद है। ऐसे में वन अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपने कार्यक्षेत्र की समस्याओं को समझने और व्यावहारिक समाधान तलाशने का आह्वान किया।
मंत्री ने भारतीय वन सेवा की बदलती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सतत विकास के मार्गदर्शक और नवाचार को बढ़ावा देने वाले नेतृत्वकर्ता के रूप में भी काम करना चाहिए। इस दिशा में भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान, सामुदायिक सहयोग और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई गई।
गौरतलब है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी द्वारा मध्य-करियर प्रशिक्षण चरण-III का आयोजन 12 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सात से नौ वर्ष की सेवा पूरी कर चुके आईएफएस अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें 18 कैडरों के कुल 68 अधिकारी भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण में नेतृत्व, रणनीतिक नीति क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन, विवाद समाधान, नैतिक नेतृत्व और वन प्रशासन जैसे विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जलवायु-लचीली वानिकी, जैव विविधता शासन, जलवायु वित्त, वन अधिकार अधिनियम, जलसंभर प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की विषयगत यात्राओं के माध्यम से अधिकारियों को वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरण पर्यटन और समुदाय आधारित वन संरक्षण की बेहतर प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य वन अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना और भारत के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए बेहतर नेतृत्व तथा नीतिगत क्षमता विकसित करना है।