Delhi Protest | दिल्ली में धारा 163 लागू: CJP प्रदर्शन, नियम और उल्लंघन पर सजा

Fri 09-Oct-2026,10:21 PM IST +05:30

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Delhi Protest | दिल्ली में धारा 163 लागू: CJP प्रदर्शन, नियम और उल्लंघन पर सजा Delhi Protest News
  • धारा 163 क्या है? सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लागू होने वाले प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी।

  • नियम तोड़ने पर सजा: BNS की धारा 223 के तहत संभावित कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान।

  • प्रदर्शन का अधिकार: शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार और उस पर लागू कानूनी प्रतिबंधों की जानकारी।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी है। वहीं, इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 लागू की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह धारा क्या है, इसके तहत कौन-सी पाबंदियां लगाई जा सकती हैं और आदेश का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी प्रदर्शन की सूचना कम से कम 10 दिन पहले देना आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि CJP के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन की जानकारी 7 अक्टूबर को दी गई थी।

पुलिस ने पिछले प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर दिशा-निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किए जाने का भी हवाला दिया है। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन से जुड़ी चिंताओं को भी अनुमति नहीं देने की वजह बताया गया है।

BNSS की धारा 163 क्या है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 तत्काल रोकथाम और त्वरित उपचार की आवश्यकता वाले मामलों में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की शक्ति देती है। यह पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 के समान प्रावधान है।

इस धारा के तहत जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट आदेश जारी कर सकते हैं। इसके लिए मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरे, सार्वजनिक शांति भंग होने, दंगे या मारपीट जैसी आशंकाओं के पर्याप्त आधार होने चाहिए।

परिस्थितियों के अनुसार, आदेश में लोगों की आवाजाही, किसी स्थान पर एकत्र होने या किसी गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि, पाबंदियां संबंधित आदेश में लिखी शर्तों और परिस्थितियों के अनुसार ही लागू होती हैं।

धारा 163 का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
अगर कोई व्यक्ति लागू प्रतिबंधात्मक आदेश की जानकारी होने के बावजूद उसका उल्लंघन करता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

इस धारा के सामान्य प्रावधान के तहत दोष सिद्ध होने पर छह महीने तक की कैद, 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि उल्लंघन से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा पैदा होता है अथवा दंगे की आशंका उत्पन्न होती है, तो अधिक कठोर प्रावधान के तहत एक साल तक की कैद, 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

हालांकि, कार्रवाई और सजा का निर्धारण मामले के तथ्यों, कानूनी शर्तों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है। केवल किसी स्थान पर मौजूद होने से हर व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अपने आप तय नहीं हो जाती।

क्या प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार नहीं है?
भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इसलिए किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने से पहले संबंधित प्रशासनिक आदेश, प्रतिबंधित क्षेत्र और लागू शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है। यदि किसी आदेश को अनुचित या अवैध माना जाता है, तो उसे उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।

कुल मिलाकर, धारा 163 का उद्देश्य संभावित अशांति या खतरे को रोकना है। प्रदर्शनकारियों के लिए जरूरी है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, वैध निर्देशों का पालन करें और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें।