ESTIC 2026 में महासागर विज्ञान पर बड़ा फोकस? समुद्री तकनीक और जैव विविधता अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
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ESTIC 2026
सीएमएलआरई में ईएसटीआईसी 2026 के महासागर विज्ञान सत्र का उद्घाटन हुआ।
इंडोओबिस पोर्टल के जरिए समुद्री जैव विविधता अनुसंधान और डेटा साझाकरण पर जोर दिया गया।
27-29 अक्टूबर को भारत मंडपम में ईएसटीआईसी 2026 का प्रमुख आयोजन होगा।
New Delhi / कोच्चि में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय समुद्री जीव संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई) में ईएसटीआईसी 2026 के ‘महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी’ विषय पर आधारित उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडोओबिस यानी हिंद महासागर जैव विविधता सूचना प्रणाली पोर्टल की हितधारक सहभागिता कार्यशाला के साथ किया गया। इसका उद्देश्य समुद्री अनुसंधान, जैव विविधता अध्ययन और वैज्ञानिक डेटा साझाकरण को मजबूत करना रहा।
इंडोओबिस पोर्टल को देश के गहन महासागर मिशन के तहत चल रहे जैव विविधता अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और डेटा प्रबंधकों ने भाग लिया। इससे समुद्री क्षेत्र में शोध और उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों को साझा करने के लिए सहयोग का दायरा बढ़ाने की कोशिश दिखाई दी।
कोच्चि में आयोजित यह कार्यक्रम ईएसटीआईसी 2026 के राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ के बाद हुआ। इसका शुभारंभ 10 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया था।
सीएमएलआरई कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण का समर्थन करता है, जिसमें समुद्री संसाधनों को आर्थिक विकास और विकसित भारत 2047 के प्रमुख आधारों में से एक माना गया है। उन्होंने ईएसटीआईसी को वैज्ञानिक सहयोग का प्रमुख वार्षिक मंच बताते हुए अत्याधुनिक शोध, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों को एक मंच पर लाने की इसकी भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान ‘महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी’ विषय पर आधारित वीडियो और सूचना ब्रोशर भी जारी किए गए। इसके साथ ही 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले ईएसटीआईसी 2026 के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।
इन कार्यक्रमों में वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन से जुड़े डॉ. किलापार्टी रामकृष्ण का मुख्य भाषण शामिल है। इसके अलावा महासागर विज्ञान और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की आमंत्रित वार्ताएं भी होंगी। इनमें डॉ. सतीश सी. शेनोई, डॉ. पूर्णिमा जलिहाल और डॉ. लीना वाचानी जैसे विशेषज्ञ शामिल होंगे।
ईएसटीआईसी 2026 में ‘महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी: ज्ञान, नवाचार और सतत प्रौद्योगिकी का सेतु’ विषय पर पैनल चर्चा भी प्रस्तावित है। इसका संचालन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन करेंगे। पैनल में नौसेना महासागर विज्ञान एवं मौसम विज्ञान, समुद्री अनुसंधान, रिमोट सेंसिंग और निजी समुद्री प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे।
डॉ. तुम्माला ने बताया कि ईएसटीआईसी 2025 की सफलता के बाद 2026 संस्करण को और व्यापक बनाने की योजना है। इसमें देशभर के वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी विभागों, हितधारकों, स्टार्टअप और नवोन्मेषकों की भागीदारी की उम्मीद है। उनका कहना है कि यह मंच भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार क्षमता को व्यापक रूप से सामने लाने में मदद करेगा।
ईएसटीआईसी 2026 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के उभरते तथा रणनीतिक महत्व वाले 12 विषयगत क्षेत्रों को शामिल किया जाना है। इनमें महासागर विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी एक प्रमुख विषय है, जिसका नेतृत्व पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय कर रहा है।