शशि थरूर का दो टूक बयान: कांग्रेस लाइन नहीं तोड़ी, ऑपरेशन सिंदूर पर रुख से पीछे नहीं हटूंगा

Sat 24-Jan-2026,10:30 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

शशि थरूर का दो टूक बयान: कांग्रेस लाइन नहीं तोड़ी, ऑपरेशन सिंदूर पर रुख से पीछे नहीं हटूंगा Shashi Tharur Statement
  • शशि थरूर ने कांग्रेस लाइन तोड़ने के आरोप खारिज किए.

  • शशि थरूर ने कांग्रेस लाइन तोड़ने के आरोप खारिज किए.

  • भविष्य में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहने का संकेत.

Delhi / Delhi :

Delhi / कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी से नाराजगी और मतभेद की अटकलों के बीच शनिवार को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी कांग्रेस की आधिकारिक लाइन का उल्लंघन नहीं किया है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर या बाहर उनके खिलाफ जो चर्चाएं चल रही हैं, वे वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खातीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र सार्वजनिक और सैद्धांतिक मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर रहा है, जिस पर उन्होंने अपने विवेक और राष्ट्रीय हित के आधार पर स्पष्ट राय रखी थी। केरल लिटरेचर फेस्टिवल में सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद के भीतर कांग्रेस के किसी भी आधिकारिक रुख से कभी विचलन नहीं किया और न ही पार्टी के निर्णयों के खिलाफ मतदान या बयानबाजी की है।

शशि थरूर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा मामला उनके लिए केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सिद्धांत और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख और पाकिस्तान की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट करने का फैसला किया, तब उन्होंने अमेरिका सहित कई देशों में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उस दौरान उन्होंने जो भी कहा या प्रस्तुत किया, वह भारत की संप्रभुता और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से था। थरूर ने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाया, और अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि इस पर उन्हें न तो कोई पछतावा है और न ही वह इसके लिए किसी से माफी मांगेंगे।

कांग्रेस सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर मतभेद कोई नई बात नहीं हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का अंतर स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से विचारों की विविधता को स्थान देती रही है और उन्होंने भी उसी परंपरा के तहत अपनी बात रखी। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी असहमति किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ नहीं थी, बल्कि एक विशेष नीति और परिस्थिति को लेकर थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस असहमति को पार्टी से दूरी या नाराजगी के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि वह आज भी कांग्रेस के मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों में विश्वास रखते हैं।

केरल लिटरेचर फेस्टिवल में मौजूद श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैलाई जा रही अटकलें अक्सर वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर पेश करती हैं। उन्होंने कहा कि उनके बयानों को संदर्भ से काटकर देखा जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। थरूर ने यह दोहराया कि संसद के भीतर पार्टी अनुशासन का उन्होंने हमेशा पालन किया है और किसी भी विधेयक या प्रस्ताव पर कांग्रेस के आधिकारिक रुख के खिलाफ खड़े नहीं हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शशि थरूर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, विचारधारा और रणनीति को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। थरूर को पार्टी के उन नेताओं में गिना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय अनुभव और स्वतंत्र सोच के लिए जाने जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर उनका स्पष्ट रुख जहां कुछ लोगों को असहज करता है, वहीं कई लोग इसे एक परिपक्व और राष्ट्रहित में लिया गया कदम मानते हैं।

अंततः शशि थरूर का यह बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह अपनी बात कहने से नहीं डरते, चाहे उसके राजनीतिक निहितार्थ कुछ भी हों। उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाना उनका राजनीतिक रास्ता रहा है, और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपनाए गए रुख से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।