यूपी राजनीति अपडेट: SIR की तारीख बढ़ी, विधायक को नोटिस, बीजेपी की नई टीम पर मंथन
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UP SIR Update
यूपी में SIR की तारीख बढ़ी, 6 मार्च तक दावा-आपत्ति.
मंत्री प्रकरण में विधायक को नोटिस, 7 दिन में जवाब.
दिल्ली में यूपी बीजेपी की नई टीम पर मंथन.
Lucknow / उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सियासत से जुड़ी तीन बड़ी घटनाओं ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चुनाव प्रक्रिया से लेकर संगठनात्मक फैसलों और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक, इन मुद्दों का असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई देगा।
सबसे पहले उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े अहम घटनाक्रम की बात करें तो चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समय-सीमा एक महीने के लिए बढ़ा दी है। अब प्रदेश में दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका 6 मार्च तक मिलेगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को जारी की जाएगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने लखनऊ स्थित लोक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में नागरिकों की ओर से समय बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए आयोग ने यह फैसला लिया है। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
दूसरी ओर, लखनऊ से जुड़ा एक राजनीतिक मामला भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है। यूपी के जल शक्ति कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को बंधक बनाने के मामले में पार्टी विधायक बृजभूषण उर्फ़ गुड्डू राजपूत को नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस यूपी बीजेपी अध्यक्ष की ओर से भेजा गया है, जिसमें विधायक से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम को संगठन ने गंभीरता से लिया है, क्योंकि इससे सरकार और पार्टी दोनों की छवि प्रभावित हो सकती है। अब सबकी निगाहें विधायक के जवाब पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर दिल्ली में यूपी बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम को लेकर मंथन तेज हो गया है। राजधानी दिल्ली में संगठन महामंत्री और पार्टी अध्यक्ष के बीच लंबी बैठक हुई, जिसमें प्रदेश संगठन को नई दिशा देने पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और किसान मोर्चा के नए अध्यक्षों के नामों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही क्षेत्रीय टीम और जिलास्तरीय संतुलन को लेकर भी मंथन किया गया। पार्टी नेतृत्व का फोकस है कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए संगठन को और मजबूत किया जाए।
बताया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान से अंतिम बातचीत के बाद यूपी बीजेपी की नई टीम की घोषणा जल्द की जा सकती है। पार्टी के भीतर इसे आने वाले चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, एक तरफ चुनाव आयोग मतदाता सूची को लेकर समय-सीमा बढ़ाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, तो वहीं भाजपा के भीतर अनुशासन और संगठन विस्तार को लेकर अहम फैसले होते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में इन तीनों मामलों का राजनीतिक असर और स्पष्ट हो सकता है।