सारंडा मुठभेड़ में इनामी नक्सली अनल दा सहित 11 ढेर

Thu 22-Jan-2026,06:10 PM IST +05:30

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सारंडा मुठभेड़ में इनामी नक्सली अनल दा सहित 11 ढेर Saranda-Naxal-Encounter-Anil-Da-Killed
  • झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सल विरोधी अभियान में एक करोड़ रुपये के इनामी अनल दा समेत 11 नक्सली मारे गए।

  • मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर नक्सलियों के ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान तेज किया।

Jharkhand / Ranchi :

Jharkhand/ झारखंड के सारंडा जंगल में गुरुवार तड़के नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। सघन सर्च ऑपरेशन में भाकपा (माओवादी) नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली अनल दा उर्फ तूफान समेत 11 से अधिक नक्सली ढेर होने की सूचना है। मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा और तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।

झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम सारंडा के घने जंगलों में सुबह सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान जंगल में छिपे नक्सलियों ने अचानक सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी हुई।

मुठभेड़ में अनल दा उर्फ तूफान के दस्ते के 14 से अधिक नक्सली शामिल थे। लगातार चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 11 से ज्यादा नक्सलियों को ढेर कर दिया। सूत्रों का दावा है कि इस दौरान एक करोड़ रुपये के इनामी अनल दा भी मारा गया है। साथ ही, 50 लाख रुपये के इनामी एक अन्य नक्सली कमांडर की मौत भी हुई।

कोल्हान रेंज के DIG अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि की और बताया कि अभियान अभी जारी है। उन्होंने कहा कि विस्तृत जानकारी अभियान के पूरी तरह समाप्त होने के बाद साझा की जाएगी।

सारंडा जंगल क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इसकी दुर्गम पहाड़ियाँ और घना जंगल नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाते हैं। पिछले महीनों में झारखंड और आसपास के राज्यों में नक्सल विरोधी अभियानों में कई प्रमुख नक्सलियों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ों के जरिए सफलता मिली है।

अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी था। वह 1987 से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था और हत्या, हथियार लूट और आईईडी ब्लास्ट जैसी घटनाओं में वांछित था। उसके ढेर होने से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और राज्य में नक्सलवाद विरोधी अभियान को मजबूती मिली है।