पर्यावरण मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर किया सामूहिक गायन
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Vande-Mataram-150-Years-Environment-Ministry-Collective-Singing
पर्यावरण मंत्रालय ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गायन आयोजित कर राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का संदेश दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन का भव्य आयोजन किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में चल रहे राष्ट्रव्यापी समारोहों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका दूसरा चरण 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करना रहा।
मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन परिसर देशभक्ति के स्वर से गूंज उठा। सामूहिक गायन के दौरान उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने एक साथ ‘वंदे मातरम’ के भावपूर्ण छंदों का उच्चारण कर राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण प्रकट किया।
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इसकी रचना को 150 वर्ष पूरे होने के बावजूद भी यह गीत आज की पीढ़ी को समान रूप से प्रेरित करता है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा गया है। देशभर में मंत्रालय के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन आयोजित किया जा रहा है, जिससे राष्ट्रव्यापी स्तर पर नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
यह आयोजन भारत सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुरू किए गए व्यापक राष्ट्रीय स्मारक कार्यक्रम का हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व से जोड़ना और देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व की भावना विकसित करना है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में कार्यरत लोगों के भीतर भी देशसेवा की भावना को और प्रबल बनाते हैं।