77वें गणतंत्र दिवस पर ओम बिरला का संदेश
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श्री बिरला ने कहा कि संविधान भारत की आत्मा है, जो विविधताओं को जोड़कर समावेशी विकास की दिशा तय करता है।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों को और सशक्त करने का आह्वान किया।
Delhi/ लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने संविधान की महत्ता, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। श्री बिरला ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना, जनशक्ति और संविधान के प्रति अटूट विश्वास का उत्सव है।
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने अपने संदेश में कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया था। यह दिन भारत के संविधान के लागू होने का प्रतीक है, जिसने हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल शासन व्यवस्था का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मा है, जो विविधताओं से भरे भारत को एक सूत्र में बांधता है। संविधान के मार्गदर्शन में भारत ने लोकतांत्रिक यात्रा के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और समावेशी विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की।
श्री बिरला ने इस वर्ष के गणतंत्र दिवस को विशेष बताते हुए कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचे जाने के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल किया और आज भी यह भारत माता के प्रति समर्पण का प्रतीक बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह प्रगति करोड़ों भारतीयों की मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का परिणाम है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करें।
लोक सभा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि उनके त्याग और दूरदर्शिता के कारण ही आज भारत एक मजबूत लोकतंत्र के रूप में खड़ा है। उन्होंने नागरिकों से लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने और स्वतंत्रता, समानता, न्याय तथा बंधुत्व के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
अपने संदेश के अंत में श्री बिरला ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो सशक्त, समावेशी और विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए “जय हिंद” के साथ अपने संदेश का समापन किया।