शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव में पीएम मोदी ने बताया भारतीय ज्ञान का मार्ग
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Shikshapatri-Bicentenary-PM-Modi-Address
शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव में पीएम मोदी ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संत संस्कृति और सामाजिक सेवा की निरंतरता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
‘लोकल के लिए वोकल’ और ज्ञान भारतम मिशन से जुड़कर शिक्षापत्री के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
Delhi/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव के अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व भगवान स्वामीनारायण द्वारा रचित शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने का साक्षी बन रहा है। उन्होंने इस अवसर को सभी संतों और करोड़ों अनुयायियों के लिए सौभाग्यपूर्ण बताया और द्विशताब्दी समारोह की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सदियों से ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर रहा है। हजारों वर्ष पुराने वेद आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। संतों और ऋषियों ने अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार वेदों के आलोक में सामाजिक, आध्यात्मिक और नैतिक प्रणालियां विकसित कीं। वेदों से उपनिषद, उपनिषदों से पुराण और फिर श्रुति-स्मृति, कथावाचन व भजन-कीर्तन के माध्यम से यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही।
श्री मोदी ने कहा कि हर युग में महान संतों और विचारकों ने इस परंपरा को नई दिशा दी। भगवान स्वामीनारायण का जीवन जनशिक्षा और जनसेवा से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने शिक्षापत्री के माध्यम से समाज को सरल, व्यावहारिक और नैतिक जीवन जीने का मार्ग दिखाया। शिक्षापत्री केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक आचरण और मानवीय मूल्यों का संहिता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विशताब्दी समारोह इस बात का आत्ममंथन करने का अवसर है कि शिक्षापत्री के आदर्श आज के जीवन में किस प्रकार अपनाए जा रहे हैं। भगवान स्वामीनारायण का जीवन आध्यात्मिक साधना और सेवा का अद्भुत संगम था। आज उनके अनुयायी शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, किसानों के कल्याण और सामाजिक उत्थान से जुड़े अनेक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो अत्यंत प्रेरणादायक है।
उन्होंने स्वदेशी, स्वच्छता और “लोकल के लिए वोकल” जैसे जन आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आध्यात्मिक संस्थाएं इन अभियानों से जुड़ती हैं, तो उनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। प्रधानमंत्री ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में सभी प्रबुद्ध संगठनों से सहयोग का आह्वान किया।
श्री मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व भारत की हजार वर्ष की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने सभी से इस पर्व के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भगवान स्वामीनारायण के आशीर्वाद और अनुयायियों के सतत प्रयासों से भारत की विकास यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।