समता और सामाजिक न्याय की रक्षा करता शोषण के विरुद्ध अधिकार: कौशाम्बी में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

Fri 23-Jan-2026,08:29 PM IST +05:30

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समता और सामाजिक न्याय की रक्षा करता शोषण के विरुद्ध अधिकार: कौशाम्बी में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित Legal Awareness Camp Kaushambi
  • कौशाम्बी में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन.

  • शोषण के विरुद्ध अधिकार, बाल अधिकार, पॉक्सो व पॉश एक्ट पर चर्चा.

  • नशा मुक्त और बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई.

Uttar Pradesh / Kaushambi District :

Kaushambi / समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करने वाला शोषण के विरुद्ध अधिकार न केवल संविधान की आत्मा है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा कवच भी है। इसी उद्देश्य को लेकर दिनांक 22 जनवरी 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में बेला देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सेंवढ़ा (चायल), कौशाम्बी में एक विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस शिविर का उद्देश्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित महत्वपूर्ण निर्णयों का प्रचार-प्रसार, नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट, पॉक्सो एक्ट तथा बाल अधिकारों के प्रति छात्रों और समाज को जागरूक करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

पराविधिक स्वयंसेवक ममता दिवाकर ने पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है और गंभीर अपराधों में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और परिवार की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश एक्ट) पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है। इसके अंतर्गत संस्थानों में आंतरिक परिवाद समिति तथा असंगठित क्षेत्र के लिए स्थानीय परिवाद समिति के गठन का प्रावधान है, जिससे महिला कर्मचारियों की भागीदारी, सुरक्षा और उत्पादकता सुनिश्चित हो सके।

शिविर में डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने शोषण के विरुद्ध अधिकार और बाल अधिकारों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के सभी रूपों को प्रतिबंधित करते हैं। ये अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी, बेगार, बंधुआ मजदूरी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। उन्होंने बताया कि अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956, किशोर न्याय अधिनियम 2015, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम 2016, पॉक्सो अधिनियम 2012 तथा बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 जैसे कानून बच्चों और महिलाओं के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रखते हैं।

डॉ. दिवाकर ने जोर देते हुए कहा कि शोषण के विरुद्ध अधिकार समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा कर समता, समानता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों को जीवित रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी श्रमिक के साथ गुलामों जैसा व्यवहार न हो और उन्हें सम्मानजनक कार्य स्थितियां व न्यायसंगत वेतन मिले।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत और बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलाई गई। साथ ही केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं—जैसे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धा पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांग सहायता योजना और शिक्षा का अधिकार अधिनियम—की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका दीपा सक्सेना ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय प्रबंधक अंजनी कुमार यादव द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अभिनव यादव, डॉ. संदीप दिवाकर, नेहा सिंह, जिज्ञासा शर्मा, राहुल दिवाकर, श्वेता यादव, सपना, विवेक कुमार यादव, पैरा लीगल वालंटियर ममता दिवाकर, अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह शिविर न केवल कानून की जानकारी देने वाला कार्यक्रम रहा, बल्कि एक जिम्मेदार और जागरूक समाज की दिशा में सार्थक पहल भी साबित हुआ।

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर
मो. 9839675023
(पीएलवी) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी