JPSC-JSSC छात्रों का आंदोलन 60 दिनों के लिए स्थगित, सरकार को अल्टीमेटम
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JPSC-JSSC Protest Update
छात्रों ने 22 विवादित परीक्षाओं को रद्द किए जाने को बड़ी जीत बताया।
JSSC-PGT, उत्पाद सिपाही और फील्ड वर्कर परीक्षा को लेकर मांग जारी।
60 दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू हो सकता है।
Ranchi / झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के 26 दिनों से जारी आंदोलन के बीच बड़ी खबर सामने आई है। JPSC-JSSC सुधार मंच ने अपने आंदोलन को फिलहाल 60 दिनों यानी दो महीने के लिए स्थगित करने का ऐलान किया है। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन स्थगित करने की जानकारी दी। मंच का दावा है कि छात्रों के लगातार दबाव के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, विवादित परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जैसी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।
26 दिनों के आंदोलन के बाद बड़ा फैसला
JPSC-JSSC सुधार मंच के अनुसार, पिछले 26 दिनों से प्रतियोगी छात्र लगातार सड़कों और अनशन स्थलों पर आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और परीक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल रहे हैं।
छात्र संगठन का कहना है कि लगातार चले आंदोलन और अभ्यर्थियों की एकजुटता के कारण सरकार पर दबाव बना। मंच के मुताबिक, आंदोलन के दौरान 22 प्रमुख विवादित परीक्षाओं को रद्द किया गया, जिसे छात्र संगठन अपनी बड़ी नैतिक और रणनीतिक जीत के तौर पर देख रहा है।
हालांकि, आंदोलन स्थगित करने के बावजूद छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनकी सभी मांगें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। संगठन की ओर से JSSC-PGT, उत्पाद सिपाही और फील्ड वर्कर जैसी अन्य संदिग्ध भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी जारी रखने की बात कही गई है।
सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम
JPSC-JSSC सुधार मंच ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन को खत्म नहीं किया गया है, बल्कि केवल दो महीने के लिए स्थगित किया गया है। इस अवधि को सरकार के कामकाज और भर्ती सुधारों की प्रगति परखने का समय बताया गया है।
छात्र संगठन के अनुसार, अगले 60 दिनों तक सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों, परीक्षा सुधारों और जांच प्रक्रिया की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। मंच का कहना है कि यदि तय समयसीमा के भीतर सुधार और जांच की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे नहीं बढ़ती है, तो दो महीने बाद आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
छात्रों की मांगों पर बनी रहेगी नजर
छात्र नेताओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित विषय नहीं है। उनका जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम और भर्ती से जुड़े फैसलों को लेकर भरोसा हो।
मंच ने सरकार के सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए कहा कि वह छात्रों के हितों को लेकर उठाए गए कदमों को देखेगा और उनके आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा।
आंदोलन स्थगित, लेकिन संघर्ष जारी रहने के संकेत
26 दिनों तक चले आंदोलन के बाद फिलहाल छात्रों ने सड़क से पीछे हटने का फैसला लिया है, लेकिन इसे स्थायी समाप्ति नहीं माना जा रहा। 60 दिनों की समयसीमा अब सरकार के लिए एक अहम परीक्षा की तरह होगी। इस दौरान भर्ती सुधारों और जांच प्रक्रिया में कितनी प्रगति होती है, इसी के आधार पर छात्रों की अगली रणनीति तय हो सकती है।
फिलहाल JPSC-JSSC सुधार मंच ने आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है, लेकिन संगठन ने साफ संकेत दिया है कि अगर छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो दो महीने बाद झारखंड में छात्र आंदोलन फिर से जोर पकड़ सकता है।