राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया जनसेवा और सत्यनिष्ठा का संदेश
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राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सत्यनिष्ठा और जनसेवा की सीख दी।
भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों से सोशल मीडिया पर नागरिकों की चिंताएं सुनने को कहा।
भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों से सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों पर जोर देने की अपील।
New Delhi / भारतीय सूचना सेवा (IIS) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए दोनों सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका और देश के सुशासन में उनके योगदान को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के कार्य भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों का अंतिम उद्देश्य समान है। दोनों सेवाएं शासन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और देश के नागरिकों की सेवा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार और विश्वसनीय सूचना एक जीवंत, संवेदनशील और उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।
निरंतर सीखने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की सलाह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सेवाकाल की शुरुआत में ही निरंतर सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज तकनीक, मीडिया, अर्थव्यवस्था और लोक नीति के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों के लिए नई परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना बेहद जरूरी है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से जिज्ञासु बने रहने, नई योग्यताएं हासिल करने और अपने अनुभवों से लगातार सीखते रहने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों को अपने निर्णयों में विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने व्यवहार में करुणा बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने सत्यनिष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी और नैतिकता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अधिकारियों की जिम्मेदारियों में निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ जनता की सेवा करने का गंभीर दायित्व शामिल है।
भारतीय सूचना सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण
राष्ट्रपति ने भारतीय सूचना सेवा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सेवा ने सरकार और नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने लोगों के सूचना प्राप्त करने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है।
राष्ट्रपति ने सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल सरकारी योजनाओं और सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए न करें, बल्कि नागरिकों की चिंताओं को सुनने, समझने और उनके समाधान की दिशा में काम करने के लिए भी करें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सूचनाएं बेहद तेजी से प्रसारित होती हैं। ऐसे वातावरण में सूचना उपलब्ध कराने वाले अधिकारियों के लिए उसकी सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत जब वर्ष 2047 की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जानकारी से सशक्त नागरिक ही देश के विकास कार्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकते हैं।
डेटा आधारित दुनिया में सांख्यिकी सेवा का महत्व
राष्ट्रपति ने भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की डेटा-आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समय पर उपलब्ध और विश्वसनीय आंकड़ों पर निर्भर करती है।
भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़ों को तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही आंकड़े देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले विभिन्न नीतिगत फैसलों का आधार बनते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों का कार्य अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रमाण-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने में मदद करेगा।
उन्होंने अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण बात हमेशा याद रखने की सलाह दी कि प्रत्येक आंकड़े और डेटासेट के पीछे वास्तविक मानव समुदाय और उनका जीवन जुड़ा होता है। इसलिए आंकड़ों को केवल संख्याओं के रूप में नहीं, बल्कि उनके सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
नागरिकों के लिए आंकड़ों की पहुंच बढ़ाने पर जोर
राष्ट्रपति ने भारतीय सांख्यिकी सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए आंकड़ों की सुलभता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक, विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी आधारित सांख्यिकीय व्यवस्था के निर्माण में अधिकारियों का योगदान महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि सूचना और आंकड़ों की गुणवत्ता सीधे तौर पर बेहतर शासन और प्रभावी नीति निर्माण से जुड़ी है। ऐसे में दोनों सेवाओं के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को व्यापक जनहित से जोड़कर देखना चाहिए।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी अपनी सेवाओं के माध्यम से देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और प्रमाण-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में सूचना, विश्वसनीय आंकड़े, तकनीक और जनसेवा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।