स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को बड़ी सौगात, 188.93 करोड़ रुपये के स्पेस वेंचर कैपिटल फंड से तीन कंपनियों को मिलेगा निवेश
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space venture capital fund
स्पेस वेंचर कैपिटल फंड में 188.93 करोड़ रुपये का योगदान।
निवेश के लिए तीन स्पेस-टेक स्टार्टअप्स का चयन।
अंतरिक्ष तकनीक, नवाचार और निजी स्पेस सेक्टर को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन।
New Delhi / भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) द्वारा स्थापित अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड अब सक्रिय रूप से देश के उभरते स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इस फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से 31 अक्टूबर 2025 को मंजूरी मिलने के बाद इसका संचालन शुरू किया गया। अब तक इस फंड में 188.93 करोड़ रुपये का योगदान किया जा चुका है, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 के 182.87 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
फंड की निवेश समिति ने प्रारंभिक चरण में तीन स्पेस-टेक स्टार्टअप्स का निवेश के लिए चयन किया है। इन कंपनियों को इक्विटी निवेश के माध्यम से पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे नई तकनीकों का विकास, अनुसंधान, व्यावसायीकरण और अपने परिचालन का विस्तार कर सकें। सरकार का मानना है कि इससे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नई गति मिलेगी और नवाचार आधारित उद्योगों को मजबूती प्राप्त होगी।
यह फंड SEBI-पंजीकृत कैटेगरी-II वैकल्पिक निवेश फंड (Alternative Investment Fund - AIF) के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि भारत के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। फंड की निवेश नीति के अनुसार विभिन्न विकास चरणों में मौजूद योग्य स्टार्टअप्स को उनकी आवश्यकता के अनुरूप इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।
फंड की निवेश रणनीति के तहत तकनीकी नवाचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण, उत्पादन क्षमता का विस्तार तथा अंतरिक्ष मिशनों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सभी निवेश SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, निजी प्लेसमेंट ज्ञापन तथा फंड के अन्य नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार, IN-SPACe ने योगदान समझौते के तहत फंड मैनेजर की निवेश आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चालू वित्त वर्ष में 182.87 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, फिलहाल यह अनुमान उपलब्ध नहीं है कि केवल इस फंड के माध्यम से भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी। सरकार का कहना है कि इसका वास्तविक प्रभाव समय के साथ स्टार्टअप्स के प्रदर्शन, नई तकनीकों के विकास, निवेश आकर्षित करने की क्षमता और अंतरिक्ष उद्योग में उनकी व्यावसायिक सफलता के आधार पर आंका जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी, उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाएं, अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोग और डीप-टेक अनुसंधान आने वाले वर्षों में भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में यह वेंचर कैपिटल फंड देश के स्पेस-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय आधार साबित हो सकता है।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नवाचार आधारित अंतरिक्ष उद्योग को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में मजबूत स्थान दिलाना है।