India Forex Reserves Update: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.237 अरब डॉलर
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India Forex Reserves Update
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.237 अरब डॉलर पहुंचा।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी, जबकि स्वर्ण भंडार में गिरावट दर्ज हुई।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों ने भारत की आर्थिक मजबूती और बाहरी भुगतान क्षमता का संकेत दिया।
Mumbai / भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 676.237 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 675.157 अरब डॉलर था। लगातार दूसरे सप्ताह दर्ज हुई यह बढ़ोतरी भारत की आर्थिक स्थिरता, बाहरी भुगतान क्षमता और वैश्विक निवेशकों के भरोसे के लिहाज से सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) 4.549 अरब डॉलर बढ़कर 551.057 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस श्रेणी में आई मजबूती ने कुल विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हालांकि, समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार के मूल्य में गिरावट दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, गोल्ड रिजर्व 3.48 अरब डॉलर घटकर 101.749 अरब डॉलर रह गया। दूसरी ओर, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 44 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर पर पहुंच गए। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 32 मिलियन डॉलर घटकर 4.761 अरब डॉलर दर्ज की गई।
गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट दर्ज की गई। उस दौरान रुपये पर दबाव बढ़ने के कारण आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा और डॉलर की बिक्री के माध्यम से रुपये को समर्थन देना पड़ा।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई से देशवासियों से विदेशी मुद्रा संरक्षण के उद्देश्य से विदेश यात्राएं सीमित करने, ईंधन की बचत करने और एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत और बाहरी आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में ताजा बढ़ोतरी भारत की आयात भुगतान क्षमता को मजबूत करती है और वैश्विक बाजार में देश की वित्तीय साख को भी बढ़ाती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश को वैश्विक आर्थिक संकट, मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और बाहरी वित्तीय झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। आरबीआई के ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है और अर्थव्यवस्था स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रही है।