India-Rwanda Trade Relations: पहली संयुक्त व्यापार समिति बैठक में कई अहम समझौते
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India-Rwanda Trade Relations
भारत और रवांडा ने व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच बढ़ाने पर सहमति जताई।
कृषि, फार्मा, खनन, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास में सहयोग मजबूत होगा।
दोनों देशों की संयुक्त व्यापार समिति की अगली बैठक अगले वर्ष रवांडा में आयोजित होगी।
Delhi / भारत और रवांडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति (Joint Trade Committee-JTC) का पहला सत्र 30 और 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, कृषि, स्वास्थ्य, खनन, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित कुमार ने किया, जबकि रवांडा की ओर से विदेश मंत्रालय के एशिया, प्रशांत और मध्य पूर्व मामलों के महानिदेशक वर्जिल रवान्यागाटारे ने प्रतिनिधित्व किया।
बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वाणिज्य विभाग के अपर सचिव यशवीर सिंह ने कहा कि यह संयुक्त व्यापार समिति दोनों देशों के बीच व्यापार की नियमित समीक्षा, निवेश को बढ़ावा देने और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक स्थायी और संस्थागत मंच का कार्य करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भारत और रवांडा के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
बैठक में दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार की समीक्षा की गई। भारत से रवांडा को मुख्य रूप से दवाइयां, जैविक उत्पाद, दोपहिया और तिपहिया वाहन, औद्योगिक मशीनरी, विद्युत उपकरण, तेल खली तथा लोहा-इस्पात उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। वहीं रवांडा से भारत को सीसा, तांबा, मसाले, आवश्यक तेल, चाय, कॉफी, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद, खनिज और बहुमूल्य पत्थरों का निर्यात होता है। दोनों देशों ने व्यापार में विविधता लाने और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
भारत ने फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, भारी इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, खेल सामग्री, रत्न एवं आभूषण तथा वैज्ञानिक उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। बैठक में यह भी बताया गया कि रवांडा के कुल फार्मास्यूटिकल आयात का लगभग 24.5 प्रतिशत भारत से आता है, जिससे भारत इस क्षेत्र में रवांडा का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। दूसरी ओर रवांडा ने मिर्च, मैकाडामिया, फ्रेंच बीन्स, एवोकाडो, चाय, कॉफी, आवश्यक तेल और खनिजों को भारत के लिए प्रमुख निर्यात उत्पाद के रूप में चिन्हित किया।
निवेश के क्षेत्र में रवांडा ने बताया कि भारत उसके दूसरे सबसे बड़े विदेशी निवेशक के रूप में उभरा है। खनन, कृषि-प्रसंस्करण, किफायती आवास, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं में निवेश के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने Invest India और Rwanda Development Board को निवेश प्रोत्साहन केंद्र के रूप में नामित करने तथा व्यापार मेलों, निवेश मंचों और खरीदार-विक्रेता बैठकों का नियमित आयोजन करने पर सहमति जताई।
बैठक में भविष्य के सहयोग के कई नए क्षेत्रों की भी पहचान की गई। भारत ने टिन, टंगस्टन और टैंटलम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) अंतिम चरण में है, जिससे दवा उद्योग, पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग और मजबूत होगा। इसके अलावा कृषि, वस्त्र, चमड़ा उद्योग, हरित परिवहन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, साइबर सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत ने आईटीईसी (ITEC), स्टडी इन इंडिया और स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से रवांडा के युवाओं के कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को समर्थन देने का भी प्रस्ताव रखा। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और दोनों देशों ने सहमति के कार्यवृत्त पर 31 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर किए। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति का दूसरा सत्र अगले वर्ष रवांडा में आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूती मिल सके।