भारत-भूटान ने जलविद्युत सहयोग और पारेषण अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर जोर

Tue 03-Feb-2026,05:04 PM IST +05:30

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भारत-भूटान ने जलविद्युत सहयोग और पारेषण अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर जोर India-Bhutan-Hydropower-Cooperation
  • बैठक में भूटान में कम आपूर्ति वाले महीनों में बिजली आपूर्ति के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

  • भारत और भूटान ने जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक स्तर पर सहयोग सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ नई दिल्ली में आज भारत और भूटान के ऊर्जा मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री श्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल और ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक से मुलाकात की। बैठक में जलविद्युत परियोजनाओं, बिजली उत्पादन क्षमता, पारेषण अवसंरचना और भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में मुख्य रूप से पुनात्सांगचू-द्वितीय (1020 मेगावाट) और पुनात्सांगचू-प्रथम (1200 मेगावाट) जलविद्युत परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से सर्वोत्तम स्तर पर संचालन में लाने के लिए कदमों पर सहमति व्यक्त की। संकोश जलविद्युत परियोजना की भविष्य की संभावनाओं और तकनीकी दक्षता के साथ-साथ वर्ष 2040 तक विद्युत पारेषण अवसंरचना की योजना पर भी विचार किया गया। बैठक में विशेष रूप से भूटान में कम आपूर्ति वाले महीनों में बिजली की नियमित और सुव्यवस्थित आपूर्ति के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

दोनों देशों ने पारंपरिक मित्रता और सहयोग की सराहना की। भूटान और भारत की ऊर्जा साझेदारी ने दशकों से क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास में योगदान दिया है। 1961 में शुरू हुए जलशक्ति सहयोग और 2006 के समझौतों ने इन संबंधों को मजबूती दी है। यह बैठक भविष्य में द्विपक्षीय परियोजनाओं की गति और ऊर्जा सुरक्षा को और बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।