हरिद्वार में कचरा रोकने गुलाब संग संवाद

Tue 03-Feb-2026,04:55 PM IST +05:30

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हरिद्वार में कचरा रोकने गुलाब संग संवाद Haridwar-Rose-Campaign-Stop-Garbage
  • हरिद्वार नगर निगम ने खुले में कचरा फेंकने से रोकने के लिए जुर्माने की बजाय संवाद और गुलाब आधारित मानवीय अभियान शुरू किया।

  • घर-घर कचरा संग्रहण और जन-सहभागिता को मजबूत कर नगर निगम स्वच्छ और सुंदर हरिद्वार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

Uttarakhand / Haridwar :

Haridwar/ अगर शहर को स्वच्छ बनाने की शुरुआत डर या जुर्माने से नहीं, बल्कि मुस्कान, संवाद और सम्मान से हो तो बदलाव ज्यादा टिकाऊ बनता है। हरिद्वार नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के तहत कुछ ऐसा ही मानवीय और प्रेरक प्रयोग शुरू किया है। खुले में कचरा फेंकने की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने ‘रोकें और समझाएं’ नामक अनोखा अभियान चलाया है, जो संवेदनशीलता के साथ नागरिकों में व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित है।
स्वच्छ भारत मिशन अर्बन 2.0 के अंतर्गत ‘स्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत’ पहल को आगे बढ़ाते हुए हरिद्वार नगर निगम ने शहर में खुले में कचरा फेंकने की आदत पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक अभिनव रणनीति अपनाई है। इस अभियान के तहत नगर निगम द्वारा चिन्हित Garbage Vulnerable Points पर अधिकारी और कर्मचारी स्वयं उपस्थित रहकर नागरिकों से सीधा संवाद कर रहे हैं।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें दंड या जुर्माने की बजाय सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया गया है। सुबह के समय जब लोग इन स्थानों पर कचरा फेंकने पहुंचते हैं, तो नगर निगम के कर्मचारी उन्हें रोकते हैं, समझाते हैं और प्रतीकात्मक रूप से गुलाब का फूल भेंट करते हैं। गुलाब यह संदेश देता है कि स्वच्छता डर से नहीं, समझ और जिम्मेदारी से आती है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका लोगों को अपमानित करने के बजाय उन्हें सोचने पर मजबूर करता है। कई नागरिकों ने पहली बार महसूस किया कि उनकी छोटी सी लापरवाही पूरे शहर की स्वच्छता को प्रभावित करती है। यही कारण है कि यह अभियान धीरे-धीरे जन-सहभागिता का रूप लेता जा रहा है।

हरिद्वार नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में पहले से ही घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित है। प्रतिदिन लगभग 180 मीट्रिक टन कचरे का संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर खुले में कचरा फेंकने की समस्या बनी हुई थी, जिसे रोकने के लिए यह संवेदनशील पहल जरूरी समझी गई।

अभियान के अंतर्गत नागरिकों को यह भी बताया जा रहा है कि वे गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में एकत्रित करें और नगर निगम की कचरा गाड़ी को ही सौंपें। साथ ही, कचरा संग्रहण से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए शिकायत नंबर साझा किए जा रहे हैं, ताकि आमजन को त्वरित सहायता मिल सके।

नगर निगम ने कई पूर्व Garbage Vulnerable Points को साफ कर उन्हें आकर्षक सेल्फी पॉइंट में भी बदला है, ताकि लोग वहां दोबारा कचरा फेंकने से बचें। अधिकारियों का मानना है कि स्वच्छता तभी स्थायी होगी, जब नागरिक इसे अपनी रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बनाएंगे।

हरिद्वार की यह पहल इस बात का मजबूत उदाहरण है कि स्वच्छ भारत मिशन केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन है। संवाद, संवेदनशीलता और सहभागिता के माध्यम से शहर को स्वच्छ, सुंदर और जागरूक बनाने की दिशा में यह अभियान एक प्रेरक कदम बनकर उभर रहा है।