UP Mango News: समुद्री मार्ग से दुबई पहुंचे दशहरी-लंगड़ा आम, किसानों की आय बढ़ेगी
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Indian Mango Export
उत्तर प्रदेश से पहली बार दशहरी और लंगड़ा आमों की सफल समुद्री खेप दुबई भेजी गई।
ICAR-CISH और APEDA की तकनीक से 25 दिन बाद भी 90% आम अच्छी गुणवत्ता में पहुंचे।
समुद्री निर्यात से किसानों को प्रति किलो 15–20 रुपये अतिरिक्त आय मिलने की संभावना।
New Delhi / भारत के ताजे आमों के निर्यात क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से पहली बार 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आम समुद्री मार्ग के जरिए सफलतापूर्वक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई भेजे गए हैं। यह उपलब्धि भारतीय आम उत्पादकों के लिए नए निर्यात अवसरों के साथ-साथ बेहतर आय का रास्ता खोलने वाली मानी जा रही है।
यह खेप 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर के माध्यम से भेजी गई। इसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित विशेष समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। आमों का निर्यात अमरोहा स्थित शहनाज़ एक्सपोर्ट ने अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से यूएई की प्रमुख रिटेल चेन लुलु ग्रुप को किया।
आमों की तुड़ाई 22 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक मानकों के अनुसार फलों का प्रबंधन किया गया। आमों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित मेटवॉश तकनीक से उपचारित किया गया, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके। इसके बाद फलों की वैज्ञानिक ग्रेडिंग की गई, अमरोहा के पैक हाउस में पैक किया गया और लगातार कोल्ड चेन बनाए रखते हुए समुद्री मार्ग से दुबई रवाना किया गया।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण जहाज के पहुंचने में कुछ देरी हुई और यह खेप 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुंची। इस तरह कटाई से लेकर बाजार तक कुल 25 दिनों का सफर पूरा हुआ। लंबी यात्रा के बावजूद लगभग 90 प्रतिशत आम अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में पाए गए। इससे यह साबित हुआ कि नई समुद्री निर्यात तकनीक लंबी दूरी तक भी आमों की गुणवत्ता बनाए रखने में सक्षम है।
इस सफलता का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। समुद्री माल ढुलाई हवाई मार्ग की तुलना में काफी सस्ती होने के कारण निर्यातकों ने किसानों को अधिक खरीद मूल्य दिया। इससे आम उत्पादकों को प्रति किलोग्राम लगभग 15 से 20 रुपये अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। इससे न केवल किसानों की कमाई बढ़ी, बल्कि भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी भी बने।
यह उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से समुद्री मार्ग के जरिए आमों के निर्यात को नया बढ़ावा मिलेगा। इससे खाड़ी देशों सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की मांग बढ़ने, निर्यात लागत घटने और उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य आम उत्पादक राज्यों के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। यह पहल भारतीय कृषि निर्यात को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।