Tri-Service Future Warfare Course 2026: नई दिल्ली में चौथे संस्करण का शुभारंभ

Mon 03-Aug-2026,10:18 PM IST +05:30

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Tri-Service Future Warfare Course 2026: नई दिल्ली में चौथे संस्करण का शुभारंभ Tri-Service Future Warfare Course 2026
  • त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण का नई दिल्ली में शुभारंभ।

  •  सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने भविष्य के युद्ध और उभरती तकनीकों पर दिया जोर।

  •  एआई, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और संयुक्त सैन्य सहयोग पर होगा विशेष फोकस।

Delhi / Delhi :

New Delhi / भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की युद्ध तैयारियों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम (Tri-Service Future Warfare Course) के चौथे संस्करण का शुभारंभ 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में किया गया। उद्घाटन सत्र में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति और आधुनिक सैन्य रणनीतियों पर विस्तृत विचार रखे।

अपने मुख्य व्याख्यान में सीडीएस ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और उभरती प्रौद्योगिकियां सैन्य अभियानों को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का समय रहते आकलन करना तथा उनके प्रभावी समाधान विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनरल राजा सुब्रमणि ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर क्षमताएं, स्वायत्त प्रणालियां, सूचना युद्ध, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली भविष्य के युद्धक्षेत्र को परिभाषित करेंगी। उन्होंने रक्षा तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, नवाचार और सहयोग पर विशेष जोर दिया।

एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय (HQ IDS) के मार्गदर्शन में आयोजित यह चार सप्ताह का पाठ्यक्रम तीनों सेनाओं के अधिकारियों के अलावा केंद्र सरकार, रक्षा उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सामरिक संगठनों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी भू-राजनीतिक परिदृश्य, उभरती प्रौद्योगिकियां, संज्ञानात्मक एवं साइबर युद्ध, बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियान, भविष्य के संघर्षों के परिदृश्य निर्माण और प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

यह पाठ्यक्रम भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य उन्मुख रणनीतिक सोच को सुदृढ़ करने, संयुक्त सैन्य संचालन की क्षमता बढ़ाने तथा बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण के अनुरूप रक्षा तैयारियों को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।