भारत का पुनर्बीमा विजन: DFS सचिव ने GIFT सिटी की वैश्विक भूमिका बताई

Mon 19-Jan-2026,05:26 PM IST +05:30

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भारत का पुनर्बीमा विजन: DFS सचिव ने GIFT सिटी की वैश्विक भूमिका बताई India-Reinsurance-Gift-City-Global-Summit
  • भारतीय बीमा बाजार दुनिया का दसवां सबसे बड़ा, बीमा पैठ और घनत्व में आगे बढ़ने की बड़ी संभावनाएं।

  • 100% एफडीआई, नियामक सुधार और IFSCA की भूमिका से पुनर्बीमा क्षेत्र में तेज़ विकास को प्रोत्साहन।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव श्री एम. नागराजू ने मुंबई में आयोजित IFS–IRDAI–GIFT City वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन 2026 के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि भारत पुनर्बीमा क्षेत्र में बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने जीआईएफटी सिटी को भारत के बीमा और पुनर्बीमा पारिस्थितिकी तंत्र का वैश्विक प्रवेश द्वार बताते हुए “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन को साकार करने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।

श्री नागराजू ने सम्मेलन के विषय “आज के भारत को जोड़ना, कल के भारत का बीमा करना – भारत विकास रोडमैप” को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच नीति-निर्माताओं, नियामकों, बीमाकर्ताओं और वैश्विक पुनर्बीमा कंपनियों को एक साथ लाकर भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को मजबूती देता है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 1.46 अरब से अधिक आबादी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद 2026 में अनुमानित 6.6 प्रतिशत वृद्धि के साथ सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

स्विस री सिग्मा रिपोर्ट 02/2025 का हवाला देते हुए सचिव ने बताया कि वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन भारत 2024 में नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का दसवां सबसे बड़ा बीमा बाजार बना रहा। भारत की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही, जबकि बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई। बीमा घनत्व बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर हो गया, जो भविष्य में बड़े विस्तार की संभावनाओं का संकेत देता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ की तरह कार्य करता है। यह न केवल मृत्यु, संपत्ति और दुर्घटना जोखिमों से सुरक्षा देता है, बल्कि दीर्घकालिक बचत और अवसंरचना परियोजनाओं के लिए पूंजी भी उपलब्ध कराता है। वित्त वर्ष 2024–25 में बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया और 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया।

पुनर्बीमा बाजार के आकार पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि 2024–25 में भारत का कुल पुनर्बीमा बाजार 1.12 लाख करोड़ रुपये का रहा। सरकार और नियामक संस्थाओं ने इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई सुधार किए हैं, जिनमें बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति, नए पुनर्बीमाकर्ताओं का पंजीकरण और बीमा कानूनों में संशोधन शामिल हैं।

अपने संबोधन के समापन में श्री नागराजू ने कहा कि IFSCA अधिनियम, 2019 के तहत जीआईएफटी सिटी को वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जीआईएफटी सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और 2047 तक सभी नागरिकों के लिए बीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य में योगदान दें।