असम पुस्तक मेले में सर्बानंद सोनोवाल बोले, किताबें समाज और राष्ट्र को दिशा देती हैं

Sat 03-Jan-2026,01:03 AM IST +05:30

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असम पुस्तक मेले में सर्बानंद सोनोवाल बोले, किताबें समाज और राष्ट्र को दिशा देती हैं
  • असम पुस्तक मेले में सर्बानंद सोनोवाल ने पढ़ने की संस्कृति, बौद्धिक विकास और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर जोर दिया।

  • युवाओं को सतही डिजिटल उपभोग से हटकर गहन पठन और आलोचनात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया गया।

  • असमिया साहित्य, स्थानीय लेखकों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व प्रोत्साहित करने पर विशेष बल।

Assam / Guwahati :

असम/ गुवाहाटी में आयोजित असम पुस्तक मेले में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने साहित्य और पठन संस्कृति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि समाज की अंतरात्मा को दिशा देने वाला माध्यम हैं। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया और असमिया साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुवाहाटी के खानापारा में आयोजित असम पुस्तक मेले का दौरा किया और इसे “ज्ञान का तीर्थ स्थल” बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले बौद्धिक विकास, रचनात्मकता और विचारशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेले में उपस्थित पाठकों और प्रकाशकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “पुस्तकें मस्तिष्क को आलोकित करती हैं, विचारों को शुद्ध करती हैं और पीढ़ियों तक समाज को समृद्ध करती हैं।” उनके अनुसार साहित्य समाज की अंतरात्मा और रचनात्मक चेतना को प्रतिबिंबित करता है, जो एक प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में सहायक होता है।

युवाओं को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत बौद्धिक उन्नति का आधार है और यह आलोचनात्मक सोच तथा कल्पनाशीलता को विकसित करती है। उन्होंने यह भी माना कि डिजिटल युग में पढ़ने की आदतों में बदलाव आया है, लेकिन सतही डिजिटल उपभोग की तुलना में गहन पठन का महत्व कहीं अधिक है।

फ्रांसिस बेकन के कथन “अध्ययन मनुष्य को पूर्ण बनाता है” का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और त्वरित कंटेंट ज्ञान का विकल्प नहीं हो सकते। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे माध्यम पारंपरिक पठन के पूरक हो सकते हैं, बशर्ते पढ़ने का आनंद बना रहे।

अपने भ्रमण के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने कई पुस्तकें खरीदीं, जिनमें डॉ. भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग पर आधारित रचनाएं शामिल थीं। यह पहल असमिया साहित्य को बढ़ावा देने और स्थानीय लेखकों के प्रति उनके समर्थन को दर्शाती है। मंत्री ने पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और मातृभाषा में साहित्य को अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।