एलपीजी कीमतों पर सरकार का रुख साफ, घरेलू गैस सस्ती, कमर्शियल दरें बाजार आधारित
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घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर, पीएमयूवाई लाभार्थियों को 553 रुपये में गैस, सरकार की सब्सिडी नीति जारी।
कमर्शियल एलपीजी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी, वैश्विक उतार-चढ़ाव का सीधा असर।
सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती से घरेलू और परिवहन ईंधन लागत में राहत।
दिल्ली/ नए साल 2026 की शुरुआत में एलपीजी और स्वच्छ ईंधन से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए स्थिति स्पष्ट हो गई है। 1 जनवरी 2026 को दिल्ली में जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि व्यावसायिक एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े होने के कारण संशोधित हुई हैं। सरकार ने यह भी साफ किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के असर से बचाने के लिए सब्सिडी और मुआवजा व्यवस्था जारी रहेगी।
हाल के दिनों में मीडिया में यह खबर चर्चा में रही कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में 111 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बाजार आधारित होती हैं और अंतरराष्ट्रीय मानक दरों, विशेषकर सऊदी अरब की एलपीजी कीमतों से जुड़ी रहती हैं। वैश्विक स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वाणिज्यिक सिलेंडरों पर पड़ता है।
इसके विपरीत, घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह कीमत गैर-पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए 853 रुपये और पीएमयूवाई लाभार्थियों के लिए 553 रुपये बनी हुई है। अगस्त 2023 की तुलना में पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए यह प्रभावी रूप से करीब 39 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों को आयात करता है। इसके बावजूद सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी, साल में नौ रिफिल तक देने की मंजूरी दी गई है, जिस पर करीब 12,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसके साथ ही, 2024–25 में अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहने के कारण तेल विपणन कंपनियों को भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को स्वीकृति दी है।
स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और सकारात्मक कदम के तहत 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा शहरों में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी कटौती की गई है। इससे घरेलू रसोई और परिवहन दोनों क्षेत्रों में ईंधन लागत कम होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने और स्वच्छ ईंधन को किफायती बनाए रखने पर बना हुआ है।