छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार हेतु 36 अधिवक्ताओं की नियुक्ति

Mon 23-Feb-2026,06:14 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार हेतु 36 अधिवक्ताओं की नियुक्ति Chhattisgarh-Highcourt-36-Central-Lawyers-Appointed
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के मामलों की पैरवी के लिए 36 अधिवक्ताओं की नियुक्ति, राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद आदेश जारी।

  • 8 सीनियर पैनल काउंसिल और 28 सेंट्रल गवर्नमेंट काउंसिल नियुक्त, तीन वर्षों तक बिलासपुर हाईकोर्ट में जिम्मेदारी निभाएंगे।

Chhattisgarh / Bilaspur :

Bilaspur/ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार से जुड़े मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए 36 अधिवक्ताओं की नई सूची जारी कर दी गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है। यह नियुक्तियां कर मामलों को छोड़कर अन्य सभी केंद्रीय मामलों के लिए की गई हैं और तीन वर्षों तक प्रभावी रहेंगी। इस निर्णय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है।

जारी आदेश के अनुसार, अधिवक्ताओं का चयन दो अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है। पहली श्रेणी ‘सीनियर पैनल काउंसिल’ की है, जिसमें 8 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है। ये अधिवक्ता केंद्र सरकार से जुड़े जटिल, संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी करेंगे। दूसरी श्रेणी ‘सेंट्रल गवर्नमेंट काउंसिल’ की है, जिसमें 28 अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई है। ये विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े नियमित मामलों की सुनवाई में केंद्र का पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

सभी नियुक्त अधिवक्ता बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के कानूनी हितों की रक्षा करेंगे। इनका कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे की नियुक्ति या कार्यकाल विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से अधिवक्ताओं की कमी और मामलों की बढ़ती संख्या के कारण केंद्र सरकार से जुड़े मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही थी। कई मामलों में समुचित पैरवी न होने से देरी की स्थिति बन रही थी। नए पैनल के गठन से न केवल सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि मामलों की गुणवत्ता पूर्ण पैरवी भी सुनिश्चित होगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित और अनुभवी अधिवक्ताओं की टीम से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे अदालत में लंबित मामलों का भार कम करने में भी मदद मिल सकती है। केंद्र सरकार की ओर से यह कदम न्यायिक कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।