राम अवतार जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Mon 06-Apr-2026,05:09 PM IST +05:30

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राम अवतार जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला Amit-Jogi-Life-Imprisonment-Jaggi-Murder-Case
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 राम अवतार जग्गी हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए अमित जोगी को साजिश का दोषी ठहराया।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई हुई, जिसमें सतीश जग्गी और सीबीआई की अपील को स्वीकार किया गया।

Chhattisgarh / Deori :

Raipur/ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व विधायक अमित जोगी को हत्या की साजिश में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनाया।

हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के 31 मई 2007 के फैसले को पलट दिया, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 302/34 और 427/34 के तहत उन्हें दोषी करार दिया है।

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी के वरिष्ठ नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 लोगों को दोषी ठहराया गया था।

शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को लूट की घटना मानते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लेकिन बाद में जब राज्य में भाजपा की सरकार बनी, तो 22 जनवरी 2004 को मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।

सीबीआई जांच में सामने आया कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें अमित जोगी सहित अन्य लोगों की भूमिका बताई गई। जांच एजेंसी ने अदालत में पर्याप्त सबूत पेश किए, जिसके आधार पर अन्य आरोपियों को सजा मिली, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

इसके बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी और सीबीआई ने इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को भेजा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद यह नया फैसला आया है।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया था। जिन सबूतों के आधार पर अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उन्हीं को अमित जोगी के मामले में नजरअंदाज किया गया।

इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है और लंबे समय से लंबित इस मामले में न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।