छत्तीसगढ़ बजट सत्र दिन 5: प्रश्नकाल, चर्चा और संकल्प
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Chhattisgarh-Budget-Session-Day-5-Assembly-Debate
प्रश्नकाल में कई विभागों से जुड़े मुद्दों पर मंत्रियों से जवाब मांगे जाएंगे, जिससे सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर स्पष्टता आएगी।
आदिवासी छात्रावासों के सुदृढ़ीकरण और भिलाई सेक्टर-9 अस्पताल उन्नयन जैसे अशासकीय संकल्प सदन में अहम राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनेंगे।
Raipur/ छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन आज राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदन की कार्यवाही में प्रश्नकाल, बजट पर सामान्य चर्चा, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अशासकीय संकल्प जैसे कई अहम विषयों पर बहस होने की संभावना है। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के आसार हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 की आय-व्यय रूपरेखा पर चर्चा के साथ विकास योजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
प्रश्नकाल के दौरान मंत्री रामविचार नेताम और मंत्री ओपी चौधरी सदस्यों के सवालों का जवाब देंगे। विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आएगा। विपक्ष महंगाई, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं को लेकर सरकार को घेर सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और मंत्री रामविचार नेताम सदन पटल पर महत्वपूर्ण पत्र और प्रतिवेदन रखेंगे। मुख्यमंत्री अतारांकित प्रश्नों के उत्तर भी प्रस्तुत करेंगे। साथ ही 15 दिसंबर 2025 की प्रश्नोत्तरी से जुड़े जवाबों के संदर्भ में विशेष वक्तव्य देने की संभावना है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और विधायक अजय चंद्राकर जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे। विधायक धर्मजीत सिंह प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। इससे सरकार को जवाबदेही के दायरे में लाने की कोशिश की जाएगी।
बजट चर्चा के बाद अशासकीय संकल्पों पर विचार होगा। विधायक रिकेश सेन और लखेश्वर बघेल अपने-अपने प्रस्ताव सदन में रखेंगे। आदिवासी छात्रावासों के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग तथा भिलाई सेक्टर-9 अस्पताल को मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा।
साथ ही याचिकाओं और समितियों की रिपोर्ट भी सदन पटल पर रखी जाएंगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 की आय और व्यय पर सामान्य चर्चा से प्रदेश की आर्थिक प्राथमिकताओं की दिशा स्पष्ट हो सकती है। कुल मिलाकर बजट सत्र का पांचवां दिन नीति, वित्त और जनहित के मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच गंभीर बहस का गवाह बन सकता है।