PM Modi on Middle East Crisis: लोकसभा में 25 मिनट का बड़ा बयान, भारत की रणनीति Explained
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PM Modi Middle East Speech
पीएम मोदी का शांति और संवाद पर जोर.
3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी.
तेल-गैस और अन्न भंडार पर सरकार की तैयारी.
Delhi / पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालातों के बीच Narendra Modi ने पहली बार लोकसभा में विस्तार से अपनी बात रखी। लगभग 25 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने न सिर्फ जंग की गंभीरता को स्वीकार किया, बल्कि भारत की रणनीति, चिंताओं और तैयारियों का भी खुलासा किया। उनका संदेश साफ था—तनाव खत्म होना चाहिए और समस्याओं का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
“जंग नहीं, बातचीत ही समाधान”
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत ही शांति के संदेश से की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा, खासकर नागरिकों और पावर प्लांट्स पर हमले, पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों से संयम बरतने और जल्द से जल्द बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। यह भारत की पारंपरिक “वसुधैव कुटुंबकम” की नीति का भी प्रतिबिंब है।
भारत की प्राथमिकता: नागरिकों की सुरक्षा
इस संकट के बीच भारत सरकार का सबसे बड़ा फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षा पर रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें से ईरान से ही करीब 1000 भारतीय लौटे हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए भारत के दूतावास और मिशन 24×7 काम कर रहे हैं और लगातार मदद पहुंचा रहे हैं।
तेल-गैस संकट से निपटने की तैयारी
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संकट पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले जहां 27 देशों से तेल-गैस आयात किया, वहीं अब यह संख्या बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दी गई है। इसका उद्देश्य है कि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
इसके साथ ही सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण पर भी काम किया है, ताकि आपात स्थिति में देश को परेशानी न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।
बिजली और ऊर्जा पर भी नजर
गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रधानमंत्री ने बिजली की बढ़ती मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयले का स्टॉक मौजूद है और बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा आज अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पश्चिम एशिया इसका बड़ा स्रोत है। इसलिए इस संकट का असर भारत पर कम से कम पड़े, इसके लिए रणनीतिक तरीके से काम किया जा रहा है।
अन्न भंडार और किसानों को राहत
प्रधानमंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी चिंता दूर की। उन्होंने कहा कि भारत के पास पर्याप्त अन्न भंडार है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं।
उन्होंने किसानों के हितों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत ने कठिन समय में भी यूरिया की कीमतों को नियंत्रित रखा और किसानों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया। इसके अलावा 6 नए यूरिया प्लांट्स, नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा जैसे कदम उठाए गए हैं।
आयात-निर्यात पर लगातार निगरानी
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने एक विशेष ग्रुप बनाया है, जो हर दिन बैठक करता है और आयात-निर्यात से जुड़ी समस्याओं पर काम करता है। इसका उद्देश्य है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की सप्लाई चेन सुचारू बनी रहे।
उन्होंने कहा कि तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़े जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संवाद जारी है।
कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद पश्चिम एशिया के कई नेताओं से फोन पर बातचीत की है और सभी से तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमिका एक जिम्मेदार और संतुलित राष्ट्र की रही है, जो शांति और स्थिरता का समर्थन करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर इस संकट का समाधान निकालना चाहिए।
संसद को बताया “ओपन यूनिवर्सिटी”
भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने संसद को “ओपन यूनिवर्सिटी” बताते हुए कहा कि यहां हर जनप्रतिनिधि सीखता है और देश के लिए काम करता है। उन्होंने हाल ही में रिटायर हो रहे राज्यसभा सांसदों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता—अनुभव हमेशा देश के काम आता है।
निष्कर्ष: संतुलन और तैयारी का संदेश
प्रधानमंत्री का यह संबोधन सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का संकेत था। एक तरफ जहां उन्होंने शांति और कूटनीति पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर देश की आर्थिक और सुरक्षा तैयारियों को भी स्पष्ट किया।
पश्चिम एशिया में जारी संकट निश्चित रूप से वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है, लेकिन भारत ने जिस तरह से बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है—वह यह दिखाता है कि देश न केवल सतर्क है, बल्कि हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार भी है।
इस पूरे संबोधन से एक बात स्पष्ट हो जाती है—भारत न तो युद्ध चाहता है और न ही अस्थिरता, बल्कि वह शांति, संतुलन और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है।