झारखंड छात्र आंदोलन: JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, CBI जांच पर अड़े छात्र

Sun 09-Aug-2026,08:11 PM IST +05:30

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झारखंड छात्र आंदोलन: JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, CBI जांच पर अड़े छात्र Jharkhand Student Protest
  • JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा राज्यपाल ने स्वीकार किया।

  • CBI जांच और CGL परीक्षा को लेकर छात्रों की मांग जारी।

  • सरकार ने CID, ED और न्यायिक निगरानी का प्रस्ताव रखा।

Jharkhand / Ranchi :

Ranchi / झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की सिफारिश पर JPSC सदस्य अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं।

यह घटनाक्रम छात्रों और राज्य सरकार के बीच लगातार चल रही बातचीत के बीच हुआ है। वार्ता के दौरान सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सहमति जताने का दावा किया, लेकिन CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करने जैसे प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। छात्रों ने साफ कर दिया है कि CBI जांच के आदेश के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। आंदोलनकारी छात्रों ने विधानसभा तक मार्च करने का भी ऐलान किया है।

CID जांच और वित्तीय अनियमितता पर ED की जांच
छात्र प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि तीन दिनों तक चली बातचीत और विस्तृत चर्चा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सरकार ने 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के समाधान के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया है।

सरकार के अनुसार, आपराधिक मामलों की जांच CID से कराई जाएगी। वहीं, यदि जांच में गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत सामने आते हैं, तो ED से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

विशेषज्ञों की समिति बनाने का प्रस्ताव
सरकार ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की समिति बनाने की बात भी कही है। हालांकि, छात्रों की उम्र में छूट से संबंधित मांग पर सहमति नहीं बन सकी।

छात्र प्रतिनिधियों ने इसके अलावा CGL परीक्षा रद्द करने की मांग भी रखी। सरकार ने इस मांग को मानने से इनकार करते हुए कहा कि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित की गई थी। परीक्षा के परिणाम घोषित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवारों को नौकरी भी मिल चुकी है। ऐसे में सरकार इसे एकतरफा रद्द नहीं कर सकती।

रिटायर्ड जज की निगरानी समिति का प्रस्ताव
छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार ने CID जांच की निगरानी हेतु एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया। सरकार का कहना है कि यदि छात्रों को जांच प्रक्रिया को लेकर कोई शिकायत होती है तो वे इस समिति के सामने अपनी बात रख सकेंगे।

हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि उनकी सबसे महत्वपूर्ण मांग CBI जांच की है, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।

98 प्रतिशत मांगों पर सहमति का सरकार का दावा
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमत हुई है। उनके अनुसार, मुख्य गतिरोध CGL परीक्षा रद्द करने और जांच एजेंसी को लेकर है। सरकार का कहना है कि अदालत के निर्देशों के तहत आयोजित परीक्षा को रद्द करना कानूनी रूप से संभव नहीं है।

दूसरी ओर, छात्रों का कहना है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच जरूरी है। छात्रों ने सरकार के CID और संभावित ED जांच के प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा आंदोलन को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। फिलहाल छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है और CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार और छात्रों के बीच आगे की बातचीत तथा प्रस्तावित विधानसभा मार्च पर सभी की नजर बनी हुई है।