यूसीआईएल की हीरक जयंती? छह दशकों की परमाणु यात्रा और यूरेनियम क्षमता का प्रदर्शन
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UCIL Diamond Jubilee
UCIL ने जादूगोड़ा में अपना हीरक जयंती वर्ष मनाया।
छह दशकों की यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण यात्रा को रेखांकित किया गया।
पत्रकार कार्यशाला और DAE प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन हुआ।
New Delhi / परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) ने 4 अक्टूबर 2026 को जादूगोड़ा में अपना हीरक जयंती वर्ष मनाया। यह अवसर यूसीआईएल की स्थापना के बाद यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में छह दशकों की यात्रा तथा भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में उसके योगदान को रेखांकित करने वाला रहा।
हीरक जयंती समारोह में यूसीआईएल के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम में संस्थान की अब तक की यात्रा को याद करने के साथ भविष्य की संभावनाओं और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई।
समारोह की मुख्य अतिथि परमाणु ऊर्जा आयोग की सदस्य-वित्त सीमा जैन रहीं। उन्होंने जादूगोड़ा स्थित सी, अनुसंधान एवं विकास केंद्र में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पायलट संयंत्र (TDPP) का दौरा किया। इसके अलावा उन्होंने जादूगोड़ा की भूमिगत खदान के 815 मीटर स्तर पर प्रस्तावित नई डार्क मैटर प्रयोगशाला के स्थल का भी निरीक्षण किया। यह प्रयोगशाला परमाणु ऊर्जा विभाग से सहायता प्राप्त साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स से संबंधित प्रस्तावित परियोजना है।
इस अवसर पर सीमा जैन ने कहा कि यूसीआईएल का हीरक जयंती वर्ष वैज्ञानिक क्षमता, संस्थागत अनुभव और राष्ट्र के प्रति छह दशकों की सेवा का उत्सव है। उन्होंने भारत की यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण क्षमताओं की नींव रखने वाले अग्रणियों और डॉ. होमी जहांगीर भाभा के योगदान को भी याद किया।
परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजित कुमार मोहंती ने भी यूसीआईएल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हीरक जयंती वर्ष यूसीआईएल के योगदान को पहचानने और भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन की दिशा में निरंतर नवाचार तथा क्षमता निर्माण के महत्व को रेखांकित करने का अवसर है।
समारोह की एक प्रमुख विशेषता नरवापहाड़ स्थित सूचना केंद्र में आयोजित पत्रकार कार्यशाला रही। अपनी तरह की इस कार्यशाला के माध्यम से मीडिया प्रतिनिधियों को यूसीआईएल के कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिला। पत्रकारों ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों से संवाद किया तथा परमाणु एवं विकिरण प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
मीडिया प्रतिनिधियों ने यूसीआईएल की यूरेनियम खनन और मिलिंग सुविधाओं का भी दौरा किया। इस दौरान उन्हें खनन कार्य, अयस्क के रखरखाव और प्रसंस्करण प्रणालियों के साथ परिचालन स्थलों पर इस्तेमाल होने वाली तकनीकों और कार्य-पद्धतियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान डीएई प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इसमें डीएई की विभिन्न इकाइयों और संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों तथा उनके औद्योगिक और सामाजिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया गया। स्कूली छात्रों के लिए आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य उन्हें परमाणु ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों और उनके उपयोगों से परिचित कराना भी रहा।
यूसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कचम आनंद राव ने कहा कि हीरक जयंती वर्ष कंपनी के प्रत्येक सदस्य के लिए गर्व का पड़ाव है। उन्होंने बताया कि छह दशकों से अधिक की अवधि में यूसीआईएल ने यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण में विशेषज्ञता तथा बुनियादी ढांचा विकसित किया है और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा तथा पर्यावरण प्रबंधन में अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है।
1967 में स्थापित यूसीआईएल भारत की स्वदेशी यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण क्षमता के विकास का अभिन्न हिस्सा रहा है। हीरक जयंती वर्ष भूमिगत और खुले खनन से लेकर अयस्क प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी विकास, व्यावसायिक सुरक्षा, विकिरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन तक विकसित राष्ट्रीय क्षमता की छह दशक लंबी यात्रा को सामने लाता है।