ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना का जलवा, 16 पदकों के साथ रचा इतिहास

Fri 14-Aug-2026,11:36 PM IST +05:30

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ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना का जलवा, 16 पदकों के साथ रचा इतिहास Army Sports Achievement
  • भारतीय सेना ने ग्लासगो में 16 पदक जीते।

  • खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, जूडो और एथलेटिक्स में इतिहास रचा।

  • राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना की।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 14 अगस्त 2026 को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हाल ही में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय सेना के खिलाड़ियों से बातचीत की। भारतीय सेना के दल ने इन खेलों में 16 पदक—8 स्वर्ण, 7 रजत और 1 कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। भारत द्वारा जीते गए कुल 39 पदकों में रक्षा बलों के कर्मियों का योगदान उल्लेखनीय रहा। रक्षा बलों के खिलाड़ियों ने कुल 18 पदक जीते, जिनमें 16 भारतीय सेना और 2 भारतीय नौसेना के खिलाड़ियों के नाम रहे।

सैनिक और चैंपियन का शानदार मेल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन में शारीरिक और मानसिक दबाव का सामना करते हुए देश के लिए पदक जीतना असाधारण उपलब्धि है।

उन्होंने भारतीय रक्षा बलों के खिलाड़ियों को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया और कहा कि ये खिलाड़ी ‘सैनिक और चैंपियन का सही मिश्रण’ हैं। उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ खेल के क्षेत्र में भी देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

महिला खिलाड़ियों ने भी रचा इतिहास
मुक्केबाजी में भारत के छह स्वर्ण पदकों में से चार महिला मुक्केबाजों द्वारा हासिल किए जाने का विशेष उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने इसे देश की बढ़ती नारी शक्ति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि महिला खिलाड़ियों की यह सफलता देश की अधिक से अधिक बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने और रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।

ग्लासगो में भारतीय सेना के दल के प्रदर्शन ने महिला खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी और उनकी प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से सामने रखा।

कई खिलाड़ियों ने रचे नए इतिहास
2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना के अभियान के दौरान कई खिलाड़ियों ने पहली बार और रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीं।

नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने ऊंची कूद में भारत के लिए पहला राष्ट्रमंडल खेलों का रजत पदक जीता। यह भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही।

नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में दो एथलेटिक्स पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता।

जूडो में हवलदार हर्ष सिंह ने 60 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। उनकी इस उपलब्धि से भारत में जूडो को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

पैरा खेलों में सूबेदार सोमन राणा और लांस नायक शुभम जुयाल ने पैरा शॉट पुट में भारत के लिए पहला स्वर्ण और रजत पदक हासिल किया।

भारोत्तोलन में भी शानदार प्रदर्शन
भारोत्तोलन में हवलदार अजय बाबू ने 79 किलोग्राम वर्ग में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का खेल रिकॉर्ड बनाया और कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर शानदार प्रदर्शन किया।

भारोत्तोलन में भारतीय रक्षा बलों की भागीदारी ने भी देश की पदक तालिका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुक्केबाजी में ऐतिहासिक सफलता
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी भारतीय दल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। भारत ने एक आयोजन में मुक्केबाजी के क्षेत्र में कुल 7 स्वर्ण पदक जीते। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह किसी भी देश द्वारा राष्ट्रमंडल खेलों के एक आयोजन में मुक्केबाजी में जीते गए सर्वाधिक स्वर्ण पदकों की उपलब्धि रही।

भारत के 7 स्वर्ण और 3 रजत पदकों में भारतीय सेना के मुक्केबाजों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। सेना के खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण और 2 रजत पदक जीते।

स्वर्ण पदक जीतने वाले सेना के मुक्केबाजों में हवलदार साक्षी, नायब सूबेदार प्रीति, नायब सूबेदार चमेली, हवलदार अरुंधति चौधरी, हवलदार सचिन सेवाच और हवलदार अंकुश शामिल रहे।

सेना के खिलाड़ियों की पदक सूची
भारतीय सेना और रक्षा बलों के स्वर्ण पदक विजेताओं में मुक्केबाजी, जूडो और पैरा शॉट पुट के खिलाड़ी शामिल रहे। हवलदार साक्षी ने 51 किग्रा, नायब सूबेदार प्रीति ने 54 किग्रा, नायब सूबेदार चमेली ने 67 किग्रा और हवलदार अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा मुक्केबाजी वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

हवलदार सचिन सेवाच ने 60 किग्रा और हवलदार अंकुश ने 80 किग्रा मुक्केबाजी वर्ग में स्वर्ण हासिल किया। जूडो में हवलदार हर्ष सिंह ने 60 किग्रा वर्ग में और पैरा शॉट पुट में सूबेदार सोमन राणा ने F-57 वर्ग में स्वर्ण जीता।

रजत पदक विजेताओं में लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में, नायब सूबेदार सर्वेश ने ऊंची कूद में, हवलदार जदुमणि सिंह और सूबेदार नरिंदर ने मुक्केबाजी में तथा हवलदार अजय बाबू ने भारोत्तोलन में पदक जीता।

इसके अलावा नायब सूबेदार गुलवीर ने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता। लांस नायक शुभम जुयाल ने पैरा शॉट पुट में रजत पदक हासिल किया। भारोत्तोलन में सीपीओ (दूरभाष) लवप्रीत सिंह और सीपीओ (पीटी) चनमबम ऋषिकांत सिंह ने भी रजत पदक जीते।

मेहनत, प्रशिक्षण और खेल विज्ञान का परिणाम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ग्लासगो में मिली इन उपलब्धियों के पीछे वर्षों का अनुशासित प्रशिक्षण, कठिन परिश्रम, पेशेवर कोचिंग, खेल विज्ञान का समर्थन और खिलाड़ियों एवं सहयोगी स्टाफ की प्रतिबद्धता रही है। मिशन ओलंपिक विंग और उसके उच्च प्रदर्शन केंद्रों ने भी खिलाड़ियों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रक्षा मंत्री ने खिलाड़ियों को आगामी एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय खिलाड़ी भविष्य में भी देश के लिए गौरव हासिल करेंगे।

इस कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। ग्लासगो में भारतीय सेना के खिलाड़ियों का प्रदर्शन न केवल देश की पदक तालिका के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि रक्षा बलों में अनुशासन और खेल प्रतिभा का संगम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी बड़ी सफलता दिला सकता है।