PM Modi ने राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन, बोले- लोकतंत्र की धरोहर बनेगी पुस्तक

Wed 12-Aug-2026,03:52 PM IST +05:30

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PM Modi ने राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन, बोले- लोकतंत्र की धरोहर बनेगी पुस्तक Ram Nath Kovind Autobiography
  • PM मोदी ने राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया।

  • पुस्तक में संघर्ष, सेवा और राष्ट्रपति पद की यात्रा का उल्लेख है।

  • पीएम मोदी ने युवाओं से आत्मकथा पढ़ने की अपील की।

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New Delhi / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of Indian Republic: My Life, My Struggles” का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक केवल पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तिगत जीवन और संघर्षों का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और समाज की महत्वपूर्ण स्मृतियों को संजोने वाली कृति भी बनेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राम नाथ कोविंद के साथ अपने लंबे व्यक्तिगत संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि कोविंद के साथ निकटता से जुड़ने, राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन पाने और उनके स्नेह को अनुभव करने का अवसर उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक स्थायी धरोहर साबित होगी।

प्रधानमंत्री ने पुस्तक के शीर्षक के अर्थ को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोविंद के जीवन के संघर्ष व्यक्तिगत थे, लेकिन उन संघर्षों से मिली सफलता भारत के गणराज्य और लोकतंत्र की विजय से जुड़ी है। उनके अनुसार, यह आत्मकथा व्यक्तिगत संघर्षों के साथ-साथ उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को भी सामने लाती है, जिसने साधारण परिस्थितियों से आने वाले व्यक्ति को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का अवसर दिया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोविंद के बचपन की कठिन परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कानपुर देहात में घर में लगी आग की उस त्रासदी को याद किया, जिसमें कोविंद ने कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस कठिन दौर में एक पड़ोसी महिला ने मां की तरह उनके पालन-पोषण में सहयोग किया। इस अनुभव ने सामाजिक सद्भाव और समाज की एकता के प्रति उनके दृष्टिकोण को प्रभावित किया।

प्रधानमंत्री ने कोविंद के पिता की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार को संभालना और बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करना उनके पिता की बड़ी भूमिका थी। यही कारण है कि कोविंद अपने पिता को अपना आदर्श मानते हैं।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसाधनों की कमी को कोविंद ने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। शिक्षा और कड़ी मेहनत के सहारे उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता बनाया और अंततः भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। प्रधानमंत्री ने उनके गांव परौंख की यात्रा का भी उल्लेख किया, जहां कोविंद ने मिट्टी को प्रणाम किया और अपने पुराने शिक्षकों के चरण स्पर्श किए। उन्होंने इसे भारतीय संस्कारों और विनम्रता का उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसे महान व्यक्तित्वों ने ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां समाज के सबसे वंचित व्यक्ति को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले। उनके अनुसार, कोविंद जैसे लोगों ने अपनी मेहनत और क्षमता से इस लंबे सामाजिक सपने को मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं से कोविंद की आत्मकथा पढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनके लेखन और जीवन के अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उनके अनुसार, कोविंद की जीवन यात्रा युवाओं में आत्मविश्वास, संघर्ष से लड़ने की क्षमता, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा पैदा कर सकती है।

प्रधानमंत्री ने कोविंद के राजनीतिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मोरारजी देसाई के साथ काम करने से उनकी राष्ट्रसेवा की भावना को राजनीति में एक दिशा मिली। इसके बाद उन्होंने संसद, राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रधानमंत्री ने उनके सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा को उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख विशेषता बताया।

राम नाथ कोविंद के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी उनके सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे विषयों पर उनके योगदान का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए आत्मकथा लिखना आसान कार्य नहीं है, लेकिन कोविंद ने यह काम समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए किया है। उनके अनुसार, इस पुस्तक में निर्धन और वंचित वर्गों से आने वाले लोगों को अपने जीवन की झलक दिखाई दे सकती है।

आत्मकथा के नैतिक संदेशों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, पवित्रता और सेवा भावना बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद चाहे कोई भी हो, जिम्मेदारियों को निभाने के लिए चरित्र और मूल्यों की आवश्यकता होती है।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि “Triumph of Indian Republic: My Life, My Struggles” केवल राम नाथ कोविंद के जीवन की कहानी नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण स्मृतियों को भी सुरक्षित रखने वाली पुस्तक बनेगी। उन्होंने लोगों, विशेषकर युवाओं, से इस आत्मकथा को पढ़ने और कोविंद के अनुभवों से सीख लेने की अपील की।