छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Chhattisgarh Liquor Scam
रामगोपाल अग्रवाल को ED ने गिरफ्तार किया।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में जांच आगे बढ़ी।
अदालत में ED रिमांड की मांग संभव।
Raipur / छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी राज्य में शराब कारोबार से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बीच हुई है। ईडी की कार्रवाई के बाद अब एजेंसी उन्हें अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड मांग सकती है।
रामगोपाल अग्रवाल इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की हिरासत में रह चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 8 जुलाई को EOW कार्यालय में सरेंडर किया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा गया था। बाद में उनकी कस्टडी बढ़ाई गई थी। 25 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे मुलाकात भी की थी।
शराब कारोबार में कथित अवैध नेटवर्क की जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में एजेंसियां सरकारी शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं, अवैध कमीशन वसूली और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। ईडी की 2026 की जांच के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री में कथित अवैध कमीशन की उगाही से जुड़ा नेटवर्क सामने आया है। एजेंसी इस मामले में EOW/ACB द्वारा दर्ज FIR के आधार पर PMLA के तहत जांच कर रही है।
ईडी ने पहले भी इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। एजेंसी की जांच में कथित तौर पर तत्कालीन नौकरशाहों, शराब कारोबार से जुड़े लोगों और अन्य व्यक्तियों के बीच नेटवर्क की भूमिका की जांच की गई है। ईडी ने 2024 में इस मामले में करीब 205.49 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच करने की जानकारी दी थी।
3400 करोड़ या 2000 करोड़? आंकड़े को लेकर अलग-अलग दावे
इस मामले की रिपोर्टिंग में घोटाले की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। मौजूदा खबरों में इसे करीब 3,400 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला बताया जा रहा है, जबकि ईडी और राज्य एजेंसियों की अलग-अलग कार्रवाइयों में इससे अलग रकम का उल्लेख किया गया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक दस्तावेज में राज्य पुलिस की जांच के संदर्भ में सरकार को करीब 2,161 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप दर्ज है। इसलिए घोटाले की अंतिम रकम को अदालत या जांच एजेंसियों के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखना उचित है।
अब ED की पूछताछ पर नजर
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क और जांच में सामने आए अन्य लोगों के साथ उनके संबंधों को लेकर पूछताछ कर सकती है। अदालत में पेशी के दौरान एजेंसी उनकी रिमांड की मांग कर सकती है। इसके बाद अदालत के निर्णय के आधार पर आगे की पूछताछ और जांच की दिशा तय होगी।
मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी रहे हैं। कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही हैं।
ईडी की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब रामगोपाल अग्रवाल से होने वाली पूछताछ और अदालत की अगली कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और कथित लेन-देन से जुड़े कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं।