आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक, हिंदी में आयुष ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

Wed 12-Aug-2026,11:05 PM IST +05:30

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आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक, हिंदी में आयुष ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक
  • हिंदी को जनकल्याण और जनसंचार का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर।

  • आयुष ज्ञान और शोध को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर चर्चा।

  • ‘अप्रतिम आयुष’ हिंदी गृह पत्रिका का विमोचन।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की तीसरी बैठक आज कर्तव्य भवन-I, नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। बैठक में सांसद राहुल सिंह लोधी और ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित समिति के सदस्य तथा मंत्रालय और उसके अधीनस्थ संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि हिंदी सलाहकार समिति केवल एक औपचारिक समिति नहीं है, बल्कि मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल कार्यालयी कार्यों तक सीमित रखने के बजाय इसे जनकल्याण और जनसंचार का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रयोग पर विशेष जोर दिया है। जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री द्वारा हिंदी के निरंतर प्रयोग से वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता को नई मजबूती मिली है।

सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक प्रयोग पर जोर
आयुष राज्य मंत्री ने कहा कि वह स्वयं अपने कार्यालय में अधिक से अधिक आधिकारिक कार्य हिंदी में सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि हिंदी में काम करने को केवल औपचारिक या संवैधानिक दायित्व न माना जाए। इसे सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी जनसंपर्क का माध्यम बनाकर दैनिक कार्यों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए जाधव ने कहा कि आयुष भारत की समृद्ध और प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियां भारत के साथ-साथ विश्वभर में लोकप्रिय हो रही हैं।

हिंदी में आयुष ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधिकारिक कार्यों, पत्राचार, प्रकाशनों, वेबसाइट, सोशल मीडिया और जनसंपर्क गतिविधियों में हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी के प्रयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। बैठक में आयुष से संबंधित ज्ञान, अनुसंधान, वैज्ञानिक साहित्य, जनकल्याणकारी योजनाओं और मंत्रालय की उपलब्धियों को हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में व्यापक रूप से उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारतीय भाषाओं के माध्यम से आयुष संबंधी जानकारी को अधिक सरल और सुलभ बनाया जाए, ताकि इसकी पहुंच देश के सामान्य नागरिकों तक प्रभावी ढंग से हो सके।

‘अप्रतिम आयुष’ पत्रिका का विमोचन
बैठक के दौरान आयुष मंत्रालय के राजभाषा विभाग की हिंदी गृह पत्रिका ‘अप्रतिम आयुष’ का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर राजभाषा विभाग की उपनिदेशक पूर्णिमा बोस ने सभी अतिथियों और सदस्यों का स्वागत किया, जबकि सहायक निदेशक डॉ. प्रकाश कुमार ने बैठक का संचालन किया।

बैठक में गैर-सरकारी सदस्य मार्कण्डेय राय, थिनलेस दोरजे, सुनील मेहरू, रम्या कृष्ण कनापार्थी और हेमचंद्र वैद्य सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि आयुष की समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मंत्रालय का लक्ष्य सरकारी कामकाज के साथ-साथ आयुष संबंधी ज्ञान, शोध और जनकल्याणकारी योजनाओं को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर आम लोगों तक उनकी पहुंच को और व्यापक बनाना है।