Indian Space Industry: 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स, 105 प्राधिकरण और रिकॉर्ड निजी निवेश

Thu 23-Jul-2026,11:36 PM IST +05:30

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Indian Space Industry: 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स, 105 प्राधिकरण और रिकॉर्ड निजी निवेश Space Sector Reforms
  • भारत के स्पेस सेक्टर में निजी निवेश 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पार पहुंचा।

  • 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप सक्रिय, 105 प्राधिकरण जारी किए गए।

  • नई अंतरिक्ष नीति, इन-स्पेस और आईएसआरओ के सहयोग से निजी भागीदारी को बढ़ावा।

Karnataka / Bengaluru :

Bengaluru / भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में 2020 के सुधारों के बाद अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि निजी निवेश, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मामले में भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई नीतियों और मजबूत नियामक व्यवस्था के कारण देश का अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है और निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में कुल निजी निवेश बढ़कर 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। केवल वर्ष 2026 में ही 187 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि 2021-22 में जहां निजी निवेश 100.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, वहीं 2023-24 तक यह बढ़कर 348.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया और 2026 तक 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है।

उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 2026 तक गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को कुल 105 प्राधिकरण जारी किए जा चुके हैं। सभी आवेदनों का मूल्यांकन इन-स्पेस (IN-SPACe) के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के आधार पर किया जाता है। सरकार निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए समर्पित सुरक्षा दिशा-निर्देश भी तैयार किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने निजी अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति और वित्तीय ढांचा तैयार किया है। इसमें भारत अंतरिक्ष नीति 2023, उदारीकृत एफडीआई नीति, इन-स्पेस के माध्यम से सरल प्राधिकरण प्रक्रिया, आईएसआरओ की सुविधाओं तक रियायती पहुंच, 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड, 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड, इन-स्पेस सीड फंड योजना, स्टार्टअप सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास कार्यक्रम और उद्योग सहयोग जैसी कई पहल शामिल हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक 17 अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों के संचालन की अनुमति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 2014 में भारत में केवल एक सक्रिय स्पेस स्टार्टअप था, जबकि आज उनकी संख्या 400 से अधिक हो चुकी है। भारतीय निजी कंपनियों ने 30 से अधिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है और पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM) के माध्यम से लगभग 45 पेलोड का प्रक्षेपण किया है। यह भारत की तकनीकी क्षमता और निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत का अंतरिक्ष उद्योग अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। भारतीय कंपनियां विदेशी निवेश आकर्षित कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर नई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। इन-स्पेस ने 45 से अधिक देशों के साथ कार्य संबंध स्थापित किए हैं और कई विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा पृथ्वी अवलोकन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (EO-PPP) के तहत भारत के पहले निजी स्वामित्व वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह के विकास की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निजी निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2020 में किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों ने केवल छह वर्षों में भारत के स्पेस सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। सरकार की नीतियों, निजी निवेश, स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक मजबूत और उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित किया है। आने वाले वर्षों में इन सुधारों से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की उम्मीद है।