PV Sindhu Wins Japan Open 2026: सुपर-750 खिताब जीतकर रचा इतिहास
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PV Sindhu Wins Japan Open 2026
पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर-750 का खिताब जीतकर इतिहास रचा।
फाइनल में अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर पहली भारतीय चैंपियन बनीं।
यह सिंधु का पहला सुपर-750 खिताब और 19 महीने बाद बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर पर बड़ी जीत है।
टोक्यो | भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाते हुए इतिहास रच दिया है। सिंधु ने जापान ओपन सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग का खिताब जीतकर इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। रविवार, 19 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने मेजबान जापान की विश्व स्तरीय खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से हराकर खिताब अपने नाम किया। लगभग 50 मिनट तक चले इस मुकाबले में सिंधु ने शानदार संयम, आक्रामक खेल और बेहतरीन रणनीति का प्रदर्शन किया।
यह जीत भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में बेहद खास मानी जा रही है। इससे पहले जापान ओपन के किसी भी वर्ग में कोई भारतीय खिलाड़ी खिताब जीतने में सफल नहीं हुआ था। इतना ही नहीं, इस टूर्नामेंट के फाइनल तक भी कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं पहुंच पाया था। सिंधु ने पहली बार फाइनल में जगह बनाई और अपने पहले ही प्रयास में खिताब जीतकर नया इतिहास लिख दिया।
यह सफलता पीवी सिंधु के लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने करीब 19 महीने बाद बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का कोई खिताब अपने नाम किया है। उनका पिछला खिताब दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में आया था। लंबे समय से चोट, फिटनेस और खराब फॉर्म से जूझ रही सिंधु ने इस शानदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि वह अब भी विश्व बैडमिंटन की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल हैं।
जापान ओपन का यह खिताब सिंधु के करियर का पहला सुपर-750 खिताब भी है। साथ ही, 2019 विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद यह उनका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब माना जा रहा है। इस जीत ने न केवल उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है, बल्कि आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी उन्हें मजबूत दावेदार बना दिया है।
फाइनल मुकाबले में शुरुआत में अकाने यामागुची ने बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने धैर्य बनाए रखा और लगातार शानदार स्मैश, तेज रिटर्न और सटीक नेट प्ले के दम पर मुकाबले पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। दोनों गेमों में यामागुची ने वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने कोई मौका नहीं दिया और दोनों गेम 21-17 के समान अंतर से जीतकर मुकाबला समाप्त कर दिया।
दोनों खिलाड़ियों के बीच यह करियर का 30वां मुकाबला था। अब तक हुए मुकाबलों में सिंधु ने 16वीं जीत दर्ज करते हुए अपने रिकॉर्ड को मजबूत किया, जबकि यामागुची के नाम 14 जीत हैं। हाल के वर्षों में जापानी खिलाड़ी का पलड़ा भारी रहा था और पिछले 10 मुकाबलों में से 7 में उन्होंने जीत दर्ज की थी। ऐसे में फाइनल में मिली यह जीत सिंधु के लिए मानसिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
सिंधु का पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन शानदार रहा। दूसरे दौर में उन्होंने चीन की हान यू को मात्र 35 मिनट में 21-16, 21-14 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद पूर्व विश्व चैंपियन जापान की नोजोमी ओकुहारा चोट के कारण मुकाबले से हट गईं, जिससे सिंधु को वॉकओवर मिला। सेमीफाइनल में उन्होंने ओलंपिक चैंपियन चेन यूफेई के खिलाफ बेहतरीन खेल दिखाया। उस समय सिंधु 21-19, 15-10 से आगे थीं, जब हैमस्ट्रिंग चोट के कारण चेन यूफेई को मुकाबला बीच में छोड़ना पड़ा।
31 वर्षीय पीवी सिंधु की यह उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के लिए नई प्रेरणा बनकर सामने आई है। उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि कठिन दौर के बाद भी मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से शानदार वापसी की जा सकती है। जापान ओपन सुपर-750 का खिताब जीतकर सिंधु ने न केवल भारतीय बैडमिंटन को नई पहचान दिलाई है, बल्कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उनकी यह ऐतिहासिक जीत भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी।