सहारनपुर / उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए 30 दिनों के भीतर हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि सरकारी भूमि के कथित अवैध उपयोग और कब्जे के बदले 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी वसूली जाए।
यह मामला पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इस मस्जिद की वैधता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और विस्तृत पड़ताल के बाद इसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जानकारी के अनुसार मामला खसरा संख्या 539, पठानपुरा स्थित कलेक्ट्रेट कचहरी परिसर की लगभग 315 वर्ग मीटर भूमि से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया गया है। साथ ही परिसर में बने डाकघर और अन्य कमरों का किराया भी मस्जिद समिति द्वारा वसूले जाने की बात कही गई थी।
जिला प्रशासन ने जांच के बाद 16 अप्रैल 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से प्रस्तुत राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि को कचहरी और कलेक्ट्रेट परिसर के रूप में दर्ज पाया गया, जो राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि है। प्रशासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल विनय चौहान और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश त्यागी ने अदालत में पक्ष रखा।
वहीं, मस्जिद पक्ष ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि यह मस्जिद लगभग 150 वर्ष पुरानी है और लंबे समय से अस्तित्व में है। हालांकि अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद मस्जिद को अवैध निर्माण घोषित कर दिया।
अपने आदेश में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है, इसलिए संबंधित संरचना को 30 दिनों के भीतर हटाया जाए। साथ ही भूमि के उपयोग और कब्जे की अवधि को देखते हुए 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है।
इस फैसले के बाद सहारनपुर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश का विधि सम्मत पालन कराया जाएगा। वहीं, मस्जिद पक्ष के पास उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती देने का कानूनी विकल्प मौजूद है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगामी दिनों में इस मामले में आगे क्या कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।