महाराणा प्रताप से लें प्रेरणा, विकसित भारत के निर्माण में युवा निभाएं भूमिका: ओम बिरला
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Om Birla Speech
ओम बिरला ने महाराणा प्रताप को देशभक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।
युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संतुलन पर दिया जोर।
Delhi / लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उदयपुर में महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मेवाड़ की पावन धरती ने पूरे विश्व को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन देशभक्ति, त्याग और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का ऐसा उदाहरण है, जो आज भी युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
ओम बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप ने सत्ता और वैभव का मोह त्यागकर अपना पूरा जीवन मातृभूमि, जनता और मेवाड़ की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और भील समुदाय सहित आम लोगों के सहयोग से संघर्ष जारी रखा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रप्रेम से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा और राणा पुंजा जैसी महान विभूतियां देश सेवा और बलिदान की अमर मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का जीवंत प्रतीक है।
लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से आह्वान किया कि वे महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि भारत आज तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में अनुशासन, समर्पण और जिम्मेदारी की भावना बेहद आवश्यक है।
ओम बिरला ने यह भी कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार को भी अपनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि मेवाड़ का प्रेरणादायक इतिहास आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा, स्वाभिमान और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के अद्वितीय योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं था, बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का भी संदेश लेकर आया।