महाराष्ट्र में फिर सियासी हलचल! क्या उद्धव ठाकरे के 7 सांसद और 16 विधायक शिंदे गुट के संपर्क में?
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Maharashtra Politics
उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाकर एकजुटता का संदेश दिया।
शिंदे गुट से संपर्क की अटकलों ने महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई।
दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किए, लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं।
Mumbai / महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चर्चाएं हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद और विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं और उनमें से कुछ नेता मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।
इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने सभी लोकसभा सांसदों की बैठक मातोश्री में बुलाई। बैठक के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या पार्टी के सभी नौ सांसद अब भी पूरी तरह उद्धव ठाकरे के साथ हैं या फिर अंदरखाने कुछ और चल रहा है। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि सभी सांसद बैठक में शामिल हुए। जो नेता मुंबई में मौजूद थे, वे मातोश्री पहुंचे, जबकि अन्य सांसदों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर कुछ नेताओं में असंतोष की भावना है। कहा जा रहा है कि कुछ सांसद और विधायक नेतृत्व की कार्यशैली से खुश नहीं हैं, लेकिन फिलहाल खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। इसी बीच बैठक में उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए कथित संदेश की भी खूब चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नेताओं से कहा कि अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है तो वह जा सकता है, लेकिन समय आने पर उसका राजनीतिक हिसाब भी होगा। इस बयान को संभावित बगावत की आशंकाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि शिंदे गुट उद्धव सेना के कुछ सांसदों और विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि दोनों पक्षों के नेताओं के बीच दिल्ली और मुंबई में कई दौर की बातचीत हुई है।
हालांकि, शिंदे गुट ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ की राजनीति से इनकार किया है। केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव ने जरूर यह स्वीकार किया कि उद्धव गुट के कई नेताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि कई नेताओं को लगता है कि उन पर लगातार संदेह किया जाता है और पार्टी नेतृत्व तक उनकी पहुंच पहले जैसी नहीं रही। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संपर्क में होने का मतलब यह नहीं कि नेता तुरंत पार्टी छोड़ देंगे।
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने पार्टी में टूट की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सात सांसद पार्टी छोड़ने वाले हैं तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं। सावंत का दावा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सस्पेंस बना हुआ है। अभी तक कोई आधिकारिक घटनाक्रम सामने नहीं आया है, लेकिन अगर आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में सांसद या विधायक पाला बदलते हैं, तो यह 2022 की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। इसलिए सभी की निगाहें अब महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर पर टिकी हुई हैं।