किशाऊ बांध परियोजना को मिली रफ्तार, अमित शाह की बैठक में 6 राज्यों के बीच बनी सहमति

Tue 16-Jun-2026,09:13 PM IST +05:30

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किशाऊ बांध परियोजना को मिली रफ्तार, अमित शाह की बैठक में 6 राज्यों के बीच बनी सहमति Kishau Dam Project
  • किशाऊ बांध परियोजना पर 6 राज्यों के बीच सहमति बनी।

  • जल घटक की 90% लागत केंद्र सरकार वहन करेगी।

  • यमुना के पुनर्जीवीकरण और जल सुरक्षा को मिलेगा बड़ा लाभ।

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ी सहमति बन गई। इस परियोजना को यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति जताई।

बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति व्यक्त की।

केंद्र सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘संवाद से समाधान’ की नीति के तहत लंबे समय से अटकी कई परियोजनाओं को गति मिली है और किशाऊ बांध परियोजना भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद इस परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि परियोजना के जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च छह राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ कम होगा और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत साझा करने के बदले उसके हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था पर भी सभी राज्यों ने सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।

किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना का उद्देश्य केवल जल संग्रहण या बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा लक्ष्य यमुना नदी में स्वच्छ और पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करना है। लंबे समय से प्रदूषण और घटते जलस्तर की समस्या झेल रही यमुना के लिए यह परियोजना राहत लेकर आ सकती है।

सरकार का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद यमुना में शुद्ध जल का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे नदी की पारिस्थितिकी में सुधार होगा और दिल्ली सहित कई राज्यों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा का लाभ मिलेगा। यह परियोजना आने वाले वर्षों में स्वच्छ, निर्मल और अविरल यमुना के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।