ग्वालियर में फर्जी डॉक्टरों पर सख्ती

Thu 29-Jan-2026,12:07 PM IST +05:30

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ग्वालियर में फर्जी डॉक्टरों पर सख्ती Gwalior-Fake-Doctors-Illegal-Clinics-Sealed-Health-Department
  • ग्वालियर में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3 दिनों में 12 अवैध क्लीनिक सील।

  • कलेक्टर के निर्देश पर चला अभियान, स्वास्थ्य विभाग ने आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रखने के दिए संकेत।

Madhya Pradesh / Gwalior :

Gwalior/ ग्वालियर जिले में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले फर्जी डॉक्टरों और अवैध क्लीनिक संचालकों पर शिकंजा कसते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लगातार तीसरे दिन कार्रवाई की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सचिन श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित टीम ने बिना पंजीयन और निर्धारित योग्यता के इलाज कर रहे क्लीनिकों की जांच की।

CMHO डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बीते तीन दिनों में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 13 क्लीनिकों की जांच की गई, जिनमें से अब तक 12 क्लीनिकों को सील किया जा चुका है। शेष पर वैधानिक प्रक्रिया जारी है। सभी क्लीनिक संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई संचालक एलोपैथिक पद्धति से इलाज करते पाए गए, जबकि उनके पास इसकी अनुमति या शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। एक क्लीनिक संचालक मात्र 12वीं पास होकर पाइल्स जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करता मिला, जो सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन क्लीनिकों को सील किया गया, उनमें मोतीझील, पुरानी छावनी और रायरू क्षेत्र के क्लीनिक शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से किसी भी क्लीनिक का CMHO कार्यालय, ग्वालियर में नियमानुसार पंजीयन नहीं कराया गया था।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना वैध पंजीयन और निर्धारित मेडिकल योग्यता के इलाज करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में न सिर्फ क्लीनिक सील किए जाएंगे, बल्कि संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

CMHO डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य आम नागरिकों को सुरक्षित और मानक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि इलाज कराने से पहले डॉक्टर और क्लीनिक की वैधता की जांच जरूर करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें।