PM मोदी का बड़ा संदेश: अमृत महोत्सव में 2047 के विकसित भारत का संकल्प

Fri 23-Oct-2026,01:41 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

PM मोदी का बड़ा संदेश: अमृत महोत्सव में 2047 के विकसित भारत का संकल्प Modi at Chinmaya Mission Amrit Mahotsav
  • पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से 33 साल पुरानी मुलाकात को याद किया।

  • प्रधानमंत्री ने युवाओं के माध्यम से सशक्त और समर्थ भारत बनाने का संदेश दिया।

  • चिन्मय मिशन से राष्ट्र निर्माण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में योगदान देने की अपील की।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / 33 साल पुरानी मुलाकात, गुरुदेव का आशीर्वाद और 2047 के विकसित भारत का संकल्प! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में भावुक नजर आए। आखिर स्वामी चिन्मयानंद की कौन-सी सीख आज भी प्रधानमंत्री को प्रेरित करती है? जानिए पूरी खबर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने पूज्य स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद किया और मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों, साधकों तथा सेवकों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है, जिसकी यात्रा आध्यात्मिक संकल्पों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी रही है।

33 साल पुरानी मुलाकात की यादें हुईं ताज
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वर्ष 1993 में वडोदरा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के जरिए गुरुदेव के होलोबॉट से संवाद करने का अनुभव ऐसा था, मानो वह 33 साल पीछे लौट गए हों। उस मुलाकात की बातचीत, गुरुदेव का स्नेह और उनका आशीर्वाद उनकी यादों में फिर से जीवंत हो उठा।

प्रधानमंत्री ने बताया कि वह स्वामी चिन्मयानंद को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे। हालांकि, गुरुदेव का 1993 में सैन डिएगो में निधन हो गया और वह समारोह में शामिल नहीं हो सके। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय गुरुदेव की कमी सभी ने महसूस की थी।

युवाशक्ति से मजबूत भारत बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी बातचीत का प्रमुख विषय युवाशक्ति का निर्माण और युवाओं के माध्यम से सशक्त तथा समर्थ भारत बनाना था। उन्होंने बताया कि गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद से देश की सेवा के उनके प्रयासों और नीतियों के केंद्र में युवा रहे हैं।

पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन के युवाओं के प्रयासों की भी सराहना की। उनके अनुसार, कई युवा साथियों ने लगभग 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया।

भारतीय ज्ञान और संस्कृति पर जोर
प्रधानमंत्री ने उपनिषदों के कथन ‘वयम् अमृतस्य पुत्राः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की चेतना, ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा उसकी स्थायी शक्ति हैं। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के गीता ज्ञान यज्ञ और वेदांत के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों को भी याद किया।

उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक को महत्व दिया गया है। साथ ही, उन्होंने भारतीय विरासत के संरक्षण और सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्जागरण का उल्लेख किया।

पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के राम मंदिर, महाकाल महालोक और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत से चोरी की गई 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को वापस लाया गया है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाना सभी संस्थाओं का साझा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने, आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से लोगों को जोड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे और इसी कालखंड में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी मनाएगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मिशन के संत, आचार्य, साधक और कार्यकर्ता विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद को नमन किया और चिन्मय मिशन के सभी सदस्यों को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दीं।