Global Mutual Funds | GIFT City में नए फंडों की होड़, भारतीय निवेशकों का विदेशों की ओर रुख!
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Global Mutual Funds
2026 की पहली छमाही में भारतीय व्यक्तियों का विदेशी निवेश लगभग 2.3 अरब डॉलर पहुंच गया।
जियोब्लैकरॉक सहित कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियां वैश्विक निवेश विकल्प ला रही हैं।
विदेशी बाजारों में निवेश से पहले मुद्रा विनिमय, बाजार में उतार-चढ़ाव और ETF प्रीमियम को समझना जरूरी है।
Mumbai / भारतीय शेयर बाजार से निराश निवेशक अब अमेरिका और दूसरे देशों के बाजारों में पैसा लगा रहे हैं। AI कंपनियों में निवेश की चाह और बेहतर रिटर्न की उम्मीद ने फंड हाउसों को भी नई रणनीति अपनाने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्यों?
भारत में निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब देश के कई बड़े निवेशक केवल भारतीय शेयर बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे अमेरिका समेत दुनिया के दूसरे बाजारों में पैसा लगाने के विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय एसेट मैनेजमेंट कंपनियां गुजरात की GIFT City में नए विदेशी निवेश फंड लॉन्च कर रही हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में ऐसे कम से कम छह फंड लॉन्च किए गए हैं। इनमें जियो फाइनेंशियल और दुनिया की बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक के संयुक्त उद्यम का **JioBlackRock Advantage World Equity Fund** भी शामिल है। HDFC एसेट मैनेजमेंट, पराग पारिख और आदित्य बिड़ला सन लाइफ जैसी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में कदम बढ़ाए हैं।
विदेशी निवेश में कितनी तेजी आई?
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में भारतीय व्यक्तियों का विदेशों में निवेश सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग **2.3 अरब डॉलर** पहुंच गया। इसमें सीधे निवेश और फंडों के माध्यम से किया गया निवेश शामिल है। यह आंकड़ा 2025 में दर्ज 2.65 अरब डॉलर के पूरे साल के रिकॉर्ड को पार करने की दिशा में इशारा करता है।
इसके पीछे एक बड़ी वजह भारतीय बाजार का तुलनात्मक रूप से कमजोर प्रदर्शन है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में निफ्टी 50 सूचकांक 5.3 प्रतिशत गिरा, जबकि इसी अवधि में MSCI Emerging Markets Index में 47 प्रतिशत और अमेरिकी S&P 500 में 32 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
इसके अलावा, भारतीय बाजार में ऊंचे मूल्यांकन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों की सीमित उपलब्धता भी कुछ निवेशकों को विदेशों की ओर आकर्षित कर रही है।
GIFT City क्यों बन रही है पसंद?
भारत में घरेलू म्यूचुअल फंडों के विदेशी निवेश पर RBI की सीमा लागू होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय फंडों के लिए कुल विदेशी निवेश की सीमा सात अरब डॉलर और किसी एक एसेट मैनेजर के लिए एक अरब डॉलर है। ये सीमाएं लगभग भर जाने से फंडों के लिए नए निवेश की गुंजाइश सीमित हो गई है।
लेकिन गुजरात की GIFT City के जरिए शुरू किए गए विदेशी निवेश फंडों पर ये सीमाएं उसी तरह लागू नहीं होतीं। इसलिए कंपनियां इस केंद्र का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक निवेश का नया रास्ता बना रही हैं।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में विदेशी परिसंपत्तियों में निवेश करने वाली फंड-ऑफ-फंड्स योजनाओं की संपत्ति सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 48,800 करोड़ रुपये हो गई। ऐसे निवेशकों की संख्या भी 34 प्रतिशत बढ़कर लगभग 20 लाख पहुंच गई।
निवेशकों के लिए अवसर या जोखिम?
विदेशी निवेश का एक फायदा यह है कि निवेशक अपने पैसे को अलग-अलग देशों और उद्योगों में बांट सकते हैं। इससे भारतीय बाजार पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, विदेशी शेयरों में निवेश करने पर मुद्रा विनिमय, बाजार में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों का जोखिम भी रहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विदेशी ETF भारतीय बाजार में अपने वास्तविक पोर्टफोलियो मूल्य यानी नेट एसेट वैल्यू से काफी अधिक प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे। उदाहरण के तौर पर, सितंबर में Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF का प्रीमियम कुछ समय पर 65 से 80 प्रतिशत तक पहुंच गया। ऐसे में निवेशकों को केवल लोकप्रियता देखकर निवेश करने से बचना चाहिए।
कुल मिलाकर, GIFT City में नए फंडों की शुरुआत बताती है कि भारतीय निवेशक वैश्विक बाजारों में बढ़ती दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लेकिन बेहतर रिटर्न की उम्मीद में विदेशों में पैसा लगाने से पहले जोखिम, लागत, मुद्रा में बदलाव और निवेश अवधि को समझना जरूरी है।