बंद कोयला खदानों की बदलेगी तस्वीर! सरकार के ‘सुविकल्प’ को मिला स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026

Wed 21-Oct-2026,10:50 PM IST +05:30

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बंद कोयला खदानों की बदलेगी तस्वीर! सरकार के ‘सुविकल्प’ को मिला स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 Coal Mines to Green Future
  • ‘सुविकल्प’ बंद खदानों के पुनरुपयोग के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करता है।

  • पहल को डिजिटल परिचालन दक्षता श्रेणी में स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 मिला।

  • 12 वेबिनार में पर्यटन, आजीविका, सामुदायिक विकास और पर्यावरण बहाली पर चर्चा हुई।

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New Delhi / क्या आपने कभी सोचा है कि जिस जमीन से वर्षों तक कोयला निकाला गया, खनन बंद होने के बाद उसी जमीन का इस्तेमाल पर्यटन, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जा सकता है? अब भारत में बंद खदानों को बेकार जमीन मानने के बजाय उत्पादक संपत्ति बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। आखिर कैसे तकनीक और डेटा की मदद से खदानों का भविष्य बदला जाएगा? आइए जानते हैं।

कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन यानी सीसीओ ने खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने और खनन के बाद भूमि के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत सुविकल्प नाम का एक विशेष खदान पुनरुपयोग उपकरण विकसित किया गया है, जो बंद होने वाली या खनन पूरा कर चुकी खदानों के लिए उपयुक्त परियोजनाओं का चयन करने में मदद करेगा।

क्या है सुविकल्प और कैसे करेगा काम?
सुविकल्प एक डेटा-आधारित निर्णय लेने वाला उपकरण है। यह तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक मानदंडों के आधार पर विभिन्न पुनरुपयोग परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है और उनकी रैंकिंग तैयार करता है। इससे संबंधित हितधारकों को यह तय करने में मदद मिलती है कि किसी खदान की जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए करना अधिक उपयुक्त होगा।

परियोजना का चयन होने के बाद उसके क्रियान्वयन के लिए प्रिज्म ढांचे के माध्यम से आगे की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। प्रिज्म खनन के बाद भूमि के ऐसे उपयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सके।

इसके अंतर्गत परियोजना की अवधारणाएं, कार्यान्वयन के तरीके, केस स्टडी, नमूना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर, निविदा दस्तावेज और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें जमीन पर उतारने में सहायता मिल सकती है।

सुविकल्प को मिला राष्ट्रीय सम्मान
इस पहल को 26 सितंबर 2026 को डिजिटल परिचालन दक्षता और डेटा-संचालित निर्णय लेने की श्रेणी में स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय मान्यता मिली। स्कॉच पुरस्कार शासन, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सार्वजनिक हित में बदलाव लाने वाली पहलों को सम्मानित करते हैं।

सुविकल्प संवाद से बढ़ेगा ज्ञान और सहयोग
सीसीओ ने खदान बंद करने और खनन के बाद भूमि के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए सुविकल्प संवाद वेबिनार श्रृंखला भी शुरू की है। इसका उद्देश्य कोयला कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करना है।

इस श्रृंखला के तहत कुल 12 विषयगत वेबिनार आयोजित किए गए। इनमें रिक्लेम और लाइव्स फ्रेमवर्क, सुविकल्प माइन रिपर्पसिंग टूल, परियोजना प्रबंधन इकाई यानी पीएमयू की स्थापना, सामुदायिक भागीदारी, पर्यटन और गंतव्य विकास, आजीविका के अवसर तथा वित्तपोषण तंत्र जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, परित्यक्त खदानों के खाली स्थानों के अभिनव उपयोग और भारत सहित अन्य देशों में खदानों के बदलाव से जुड़े अनुभवों पर भी चर्चा की गई।

पर्यावरण संरक्षण से लेकर रोजगार तक पर जोर
इन पहलों का उद्देश्य केवल खदान बंद करने से जुड़े नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण बहाली, स्थानीय आजीविका, सामुदायिक विकास और आर्थिक विविधीकरण को भी बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के नेतृत्व में हुई चर्चाओं से टिकाऊ पुनरुपयोग परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए व्यावहारिक सुझाव सामने आए हैं।

कुल मिलाकर, कोयला मंत्रालय की यह पहल बंद खदानों को नई उपयोगिता देने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के प्रयास का हिस्सा है। यदि इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो खनन के बाद खाली पड़ी जमीन पर्यावरण सुधार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकती है।