भारत में कचरे से बनेगी कमाई! सरकार का सर्कुलर इकोनॉमी पर बड़ा जोर

Thu 22-Oct-2026,09:31 PM IST +05:30

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भारत में कचरे से बनेगी कमाई! सरकार का सर्कुलर इकोनॉमी पर बड़ा जोर Circular Economy
  • नौ प्रकार के कचरे के प्रबंधन के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं।

  • लगभग 499.60 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।

  • सरकार रीसाइक्लिंग, रोजगार और महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी को बढ़ावा दे रही है।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या प्लास्टिक, ई-कचरा, पुरानी बैटरियां और बेकार टायर देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे सकते हैं? भारत सरकार अब कचरे को सिर्फ समस्या नहीं, बल्कि संसाधन और रोजगार के अवसर के रूप में देख रही है। नई नीतियों, डिजिटल निगरानी और रीसाइक्लिंग के जरिए देश में बड़ा बदलाव लाने की कोशिश हो रही है। आखिर इस योजना से उद्योगों, शहरों और आम लोगों को क्या फायदा मिल सकता है?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई के सर्कुलर इकोनॉमी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए लगातार कदम उठा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कानूनी ढांचे को मजबूत किया है। इसके तहत नौ तरह के कचरे के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। इनमें प्लास्टिक कचरा, बैटरी, ई-कचरा, पुराने टायर, इस्तेमाल किया गया तेल, पुराने वाहन, निर्माण और विध्वंस से निकला कचरा, अलौह धातुओं का कबाड़ और ठोस कचरा शामिल हैं।

499.60 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण
मंत्री के अनुसार, विनियमित अपशिष्ट श्रेणियों के अंतर्गत अब तक लगभग 499.60 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है। वहीं, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व यानी ईपीआर ढांचे के तहत 86,043 से अधिक उत्पादक और 4,880 रीसाइकलर पंजीकृत हैं।

ईपीआर व्यवस्था के अंतर्गत उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने उत्पादों के उपयोगी जीवन के अंत में उनका पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करें।

इस व्यवस्था में ईपीआर प्रमाणपत्रों के हस्तांतरण से रीसाइकल करने वालों को वित्तीय प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे रीसाइक्लिंग की क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलती है।

सिर्फ नियम नहीं, लोगों की भागीदारी भी जरूरी
भूपेंद्र यादव ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल नियम बनाकर स्थापित नहीं की जा सकती। इसके लिए लोगों की सोच और संसाधनों के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ यानी LiFE पहल का उल्लेख करते हुए संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की।

उन्होंने उद्योग जगत से डिजिटल अनुपालन, ईपीआर बाजार और लेनदेन की समय-सीमा से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर सुझाव साझा करने का आग्रह भी किया। प्लास्टिक कचरे के मामले में उत्पादकों और रीसाइकलरों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

गीले और सूखे कचरे को अलग करना महत्वपूर्ण
ठोस कचरा प्रबंधन पर चर्चा करते हुए मंत्री ने तकनीक, ऑनलाइन निगरानी, जवाबदेही और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिरता को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि कचरे को चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष ध्यान देने योग्य कचरा—में अलग करना जरूरी है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से पुराने कचरे की समस्या कम करने और शहरी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी पर जोर
मंत्री ने उद्योग जगत से ई-कचरे और पुरानी बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी, पुनर्चक्रित कच्चे माल के बाजार विकसित करने और सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने में अधिक भागीदारी की अपील की।

कुल मिलाकर, भारत की सर्कुलर इकोनॉमी पहल का लक्ष्य कचरे को कम करना, संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसकी सफलता सरकार, उद्योग, शहरी निकायों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों पर निर्भर करेगी।