इंदौर दूषित पानी संकट: भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 33 पहुंचा
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भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने जानलेवा रूप लिया, एक महीने में 33 मौतों से प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से स्थायी समाधान, साफ पानी और जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।
Indore/ इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। लगातार सामने आ रहे नए मामलों और मौतों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। ताजा घटना में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बल्कि नगर निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इलाके में लगातार हो रही मौतों से स्थानीय लोग बेहद आक्रोशित हैं। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से नलों से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिसकी शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि हर घर में कोई न कोई बीमार है।
इससे पहले रविवार को 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की भी दूषित पानी से फैली बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उन्हें उल्टी-दस्त की गंभीर समस्या के बाद कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। हालत नाजुक होने पर उन्हें भी वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी से संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित इलाके में पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और अस्थायी रूप से टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों की मांग है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक यह संकट खत्म नहीं होगा। लगातार हो रही मौतों ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है।