VISV-2026: DRDO ने वैश्विक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए पेश किया भारत का नया विजन!
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VISV-2026
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नई दिल्ली में VISV-2026 का उद्घाटन किया।
DRDO ने अपने रक्षा उत्पादों की अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषा में पुस्तिका जारी की।
कार्यक्रम में रक्षा निर्यात, तकनीकी आदान-प्रदान, सह-विकास और वैश्विक साझेदारी पर चर्चा हुई।
New Delhi / दुनिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत अपनी रक्षा ताकत को नई दिशा देने में जुटा है। अब लक्ष्य सिर्फ हथियार बनाना नहीं, बल्कि मित्र देशों के साथ तकनीक साझा करना और मजबूत रणनीतिक साझेदारी कायम करना है। इसी दिशा में दिल्ली में एक बड़ा कदम उठाया गया।
भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने और मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र यानी CENJOWS के सहयोग से VISV-2026 का आयोजन किया। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
VISV-2026 का पूरा विचार चार महत्वपूर्ण स्तंभों पर आधारित है—विजन, नवाचार, समन्वय और मूल्य। कार्यक्रम की मुख्य थीम थी—रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और वैश्विक साझेदारियों को मजबूती देना। इसके तहत एक विशेष संगोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसका विषय था—साझेदार देशों के लिए DRDO के रक्षा समाधान: प्रौद्योगिकी से रणनीतिक साझेदारी तक।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि ये चारों स्तंभ भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार करने में मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उन्होंने बताया कि विजन का उद्देश्य भविष्य की रक्षा जरूरतों का अनुमान लगाना है, जबकि नवाचार अनुसंधान को प्रभावी तकनीक और उपयोगी समाधानों में बदलता है।
वहीं, समन्वय के जरिए सशस्त्र बलों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को एक मंच पर लाया जाता है। जबकि विश्वास, आपसी सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्य सहयोग को मजबूत बनाते हैं।
संजय सेठ ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान की भूमिका पर जोर दिया। उनके अनुसार, स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन, विकास और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने से भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेगा।
रक्षा राज्य मंत्री ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अनुसंधान और तकनीकी प्रगति को वास्तविक समाधानों में बदलने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने DRDO के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर और भारतीय उद्योग उन्नत रक्षा तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस अवसर पर संजय सेठ ने DRDO के उत्पादों की एक विदेशी भाषा संकलन पुस्तिका भी जारी की। यह पुस्तिका अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में तैयार की गई है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भारत के रक्षा उत्पादों और तकनीकी समाधानों की जानकारी देना तथा सहयोग को आसान बनाना है।
कार्यक्रम में रक्षा सचिव और DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी क्षमता और संस्थागत साझेदारी के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। वहीं, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और विनिर्माण साझेदारी के अवसर तलाशने की जरूरत है।
उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित होने वाले एयरो इंडिया 2027 का भी उल्लेख किया। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को उच्चस्तरीय औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक और महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी माहौल में रक्षा कूटनीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण, आपसी विश्वास और उभरती तकनीकों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
VISV-2026 में संयुक्त सहयोग और साझेदारी के अवसरों पर एक संवादात्मक चर्चा भी हुई। इसमें रक्षा उत्पादन विभाग, DRDO, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स, भारतीय उद्योग और विभिन्न देशों के रक्षा अताशे शामिल हुए। चर्चा के दौरान रक्षा निर्यात, तकनीकी आदान-प्रदान, उत्पादों के अनुकूलन, सह-विकास और सह-उत्पादन जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सशस्त्र बलों, शिक्षा जगत और भारतीय रक्षा उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मित्र देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
कुल मिलाकर, VISV-2026 भारत की रक्षा नीति में तकनीकी आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। भारत अब केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता के माध्यम से मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक और परस्पर लाभकारी साझेदारी भी मजबूत करना चाहता है।